
–राजेंद्र जोशी
मप्र सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा प्रदेश भर में निजी स्कूल की तर्ज पर वर्क तो होम के द्वारा सरकारी विधालयो के बच्चो को पढ़ाने के लिये जुलाई से ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रारम्भ कर दिया हे और उस पाठयक्रम का नाम “हमारा घर हमारा विधालय” दिया गया हे,डीजीलेप नामक एप में पाठयक्रम से सम्बन्धित शिक्षण सामग्री भोपाल से लोड की जा रही हे,यह शिक्षण कागजो पर प्रभावी नजर आ रहा हे लेकिन जमीनी हकीकत से कोसो दूर लगने के साथ कागजी खानापूर्ति करने वाला साबित हो सकता हे |
जून 2020 को प्रदेश की स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव और सर्व शिक्षा मिशन के आयुक्त के द्वारा फेसबूक लाइव के माध्यम से उक्त पाठ्यक्रम के बारे में बताया उसके अनुसार यह ऑनलाइन पाठ्यक्रम अनलोंक -2 के चलते और 31 जुलाई तक स्कूल बंद रहने के कारण प्रारम्भ किया जा रहा हे, ऑनलाइन पाठ्यक्रम के द्वारा बच्चे तीन माध्यम से पढ़ाई करेंगे,पहला माध्यम एंडराइड फोन,दूसरा रेडियो और तीसरा टेलीवीजन हे |
हम अगर तुलनात्मक रूप से देखे तो निजी विधालय में पढने वाले बच्चो के पास तीनो साधन याने टीवी,रेडियो और एंडराइड फोन उपलब्ध हे जबकि सरकारी स्कूल के विधार्थियों के पास इनका अभाव रहता हे,सरकारी स्कूल को भी दो भागो में बांटा जा सकता हे एक शहरी और दूसरा ग्रामीण,जहा तक शहरी सरकारी स्कूल हे वहा के बच्चो के पास सुविधा हो सकती हे लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में ऑनलाइन पढ़ाई करवाना इतना आसान काम नही हे|
अब आप ग्रामीण क्षेत्र को ऐसे समझ सकते हे,एक गाव में चार या पांच फलिये (मोहल्ले) हे उन सभी में प्राथमिक सरकारी स्कूल हे,कही पर माध्यमिक शाळा भी हे,और 10 से 15 किमी के अंतर पर हाई स्कूल और हायरसेकण्ड्री स्कूल भी हे,इन गावो के किसी फल्ये (मोहल्ले) में मोबाईल नेटवर्क हे तो किसी में नही,साथ ही परिवार इतने सक्षम भी नही हे की हर बच्चे को एंडराइड फोन उपलब्ध करवा दे,अगर परिवार में एक फोन हे तो वह घर के मुखिया के पास हे वह जब घर आयेगा तब बच्चे उसका इस्तेमाल कर पाएंगे | अब टीवी और रेडियो की बात करे तो ग्रामीण क्षेत्र में सम्पन्न व्यक्ति के पास टीवी हो सकता हे हर परिवार में यह संभव नही हे और अगर हे तो यहां पर नेटवर्क की समस्या आड़े आती हे,तीसरा साधन रेडियो हे इसे नई पीढी के की लोगो ने शायद ही देखा होगा |
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रो के लिये पंचायतो को निर्देशित करवाया हे की वे पंचायत भवन या कार्यालय में टीवी के माध्यम से बच्चो की पढ़ाई में सहयोग करे,अब सरकार को क्या मालूम सरकारी टीवी कहा गये (बडवानी जिले के पाटी विकासखंड के हरला,गुडी,रोसर,जिवाणी,सेमलेट सहित अन्य ग्रामो में सर्वे के आधार पर) सरकारी रिकार्ड में तो हर पंचायत को एलईडी की राशि सालो पहले दी जा चुकी हे लेकिन पंचायत कार्यालय में टीवी नही हे,इसकी शिकायत न तो शिक्षा विभाग ने पंचायत विभाग को की हे न ही उन्हें इसकी जानकारी हे,इस बारे में सभी पंचायतो से लगभग रटे रटाये जवाब मिलते हे.टीवी खराब हे सुधरने गई,टीवी चोरी हो सकती हे इसलिए घर पर हे,पंचायत भवन की छत खराब हे बरसात के पानी से खराब हो सकती हे उसे यहां से हटा कर रखा गया हे,रखा कहा गया हे यह किसी को नही मालुम|
सरकारी शिक्षको को हर हाल में बच्चो तक पहुचना हे इसके लिये वे फलिये फलिये दोड लगा रहे हे एक गाव का क्षेत्रफल 4 से 5 किमी का हो जाता हे, शिक्षक का वहा पहुचना और नालो पहाडियों के माध्यम से बच्चो के घरो तक पहुचना आसन नही होता,परिवार के दवारा बताया जाता हे की बच्चा ग्वाल गया (पशुओ को चराने ले गया) उसके बाद सब खानापुर्ती करने में शिक्षको को शाम हो जाती हे,अगर एक कक्षा में 50 से अधिक बच्चे हे तो आप अंदाज लगा सकते हे शिक्षक केसे उनकी जानकारी एकत्र करेगा और केसे ऑनलाइन पढ़ायेगा |
मप्र के पिछड़े और आदिवासी बहुल बडवानी जिले के पाटी विकास खंड के हरला,गुडी,रोसर,जिवाणी,सेमलेट ग्रामो में जाकर देखने पर पता चला की अगर उन्हें फ़ोन पर बात करनी हे तो किसी पहाड़ी पर या ऊंचाई वाले स्थान पर जाकर बातचीत करनी पडती हे,इस बात को स्वयं हमने व्यवहारिक तरीके से देखा और समझा | कई स्थानों पर बच्चे आप को ऐसे देखते जेसे आप और दुनिया से आये हे तो कही बच्चे बात करने के स्थान पर ट्रेक्टर ट्राली के नीचे छिप गये और कही दूर पहाड़ी पर अपने पशुओ के साथ नजर आये,तो कोई हमे पहाड़ी से देखता नजर आया |
दूसरी और एक शासकीय कन्या शिक्षा परिसर के शिक्षक मित्र ने बताया की जब उन्होंने एक बालिका के पिता से ऑनलाइन पढाई के लिये बालिका को कुछ समय अपना फ़ोन उपलब्ध करवाने को कहा तो उसने उल्ट सवाल किया माडसाब क्या गारंटी फोन से पढ़ाई होगी और फोन का उपयोग गलत हुआ तो इसका जिम्मेदार कोन रहेगा,शिक्षक मित्र निरुत्तर हो गये |
ग्रामीण क्षेत्र की भोगोलिक स्थिति को देखे तो अच्छे अच्छे शिक्षाविद चकरा जायेंगे की ऑनलाइन पाठ्यक्रम के माध्यम से इन्हें पढाने की योजना बनाने वालो ने ग्रामीण क्षेत्र देखे हे या नही,निशित तोर पर उत्तर नही होगा, वातानुकूलित कक्षों में सरकारी विधालयो के लिये पढाई की योजना बनाने वाले ग्रामीण बच्चो की तुलना हावर्ड और महानगरो में पढने वाले नवधनाढ्य वर्ग से करके उनका उपहास उड़ा रहे हे |
स्वतंत्र पत्रकार
navrajendra@gmail.com 9425150220







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