ऊमरी-उरई। सार्वजनिक तालाबों पर कायम कब्जे छुड़ाने की मुहिम रंग नही ला पा रही है। उच्चतम न्यायालय के तालाबों के अतिक्रमण को हटाने के कड़े आदेशों के बाद इसके लिए यहां भी सरगर्मी हुई थी जो बाद में औपचारिकता में सिमट गई। तब से समय-समय पर कागजों में इसकी कवायद होती रहती है जो इच्छाशक्ति के अभाव में में धरातल पर नही उतर पाती।
ऊमरी नगर पंचायत को तालाबों की नगरी का दर्जा दिया जा सकता है। इस छोटी नगर पंचायत में लगभग एक दर्जन समृद्ध तालाब हैं जिनका रकबा कागजों में 81 एकड़ दर्ज है। लेकिन वास्तविकता में सभी तालाब बहुत हद तक सिकुड़ गये हैं।
अगर तालाब बहाल हो जाये ंतो जल संरक्षण से न केवल नगर पंचायत बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी भूमिगत पानी का स्तर ऊंचा हो सकता है। पर जिम्मेदारों को इसकी कोई परवाह नही है। उनकी छूट के कारण तालाबों में पक्के मकान तक बन चुके हैं। जिनको चिन्हित भी किया जा चुका है। फिर भी नगर पंचायत का प्रशासन अभी तक खामोश है।

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