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उरई। जिला कार्यक्रम अधिकारी इफ्तेखार अहमद ने कुठौन्द ब्लाक के 13 गांवों में आंगनबाडी केन्द्रो का औचक निरीक्षण किया जिससे यह उजागर हुआ कि अभी भी कार्यकत्रियां सुधरने को तैयार नहीं है जबकि औचक निरीक्षण का लगातार अभियान चलाया जा रहा है जिसमें केन्द्र बन्द रखने वाली कार्यकत्रियों की सेवायें समाप्त की जा चुकी हैं जिससे उनमें खलबली मची हुयी है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी के ढिलाई ओढे रहने से कार्यकत्रियां बेलगाम हो गयी थी और आंगनबाडी केन्द्रो का बन्द रहना आम बात हो गयी थी । इसी बीच कदौरा के आश्रम पद्धति विद्यालय का जायजा लेने पहुंची जिलाधिकारी चांदनी सिंह ने जब अचानक आस पास की आंगनबाडी केन्द्रों का भी निरीक्षण किया तो इसकी पोल खुली नतीजतन उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को फटकार लगाते हुये फील्ड पर निकलने और अनिवार्य रूप से आंगनबाडी केन्द्रों का खुलना सुनिश्चित करने के लिये कहा । जिलाधिकारी के इस सख्त रूख का असर दिखाई दिया जब डीपीओ ने आंगनबाडी केन्द्रों के औचक निरीक्षण का अभियान छेडा ।
गुरूवार को इसके तहत डीपीओ ने कुठौन्द ब्लाक के हदरूख , बस्तेपुर , कैथवां , आलमपुर , दौन , मदारीपुर, बरियापुर (हरसिंहपुर ) आंगनबाडी केन्द्रों के बाद कुठौन्द के बाल विकास परियोजना कार्यालय का भी निरीक्षण किया ।
इस दौरान अंागनबाडी केन्द्र बस्तेपुर की सहायिका ममता के बिना किसी पूर्वानुमति के एक माह से अनुपस्थित चलने की सूचना मिली । ग्राम आलमपुर के प्रथम आंगनबाडी केन्द्र की सहायिका सुमन एवं द्वितीय आंगनबाडी केन्द्र की कार्यकत्री गीता निगम के अनुपस्थित होने के सम्बन्ध में अग्रिम आदेशों तक का वेतन रोक दिया । क्षेत्रीय मुख्य सेविका मैनादेवी द्वारा अपने परिक्षेत्र के केन्द्रों का पर्यवेक्षण न करने तथा दूरभाष पर मोबाइल बन्द मिलने की दशा में वेतन रोकते हुये उनसे स्पष्टीकरण मांगा । निरीक्षण के दौरान सभी केन्द्रों पर बच्चों की नाम मात्र की उपस्थित मिली । जिसके क्रम में सभी आंगनबाडी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को निर्देश दिये कि बच्चों की उपस्थिति बढाना सुनिश्चित करें। डीपीओ ने कहा कि यदि भविष्य में केन्द्र भ्रमण के दौरान पायी गयी कमियों में सुधार नहीं हुआ तो सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की जायेगी ।







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