सिरसाकलार-उरई। छैः दिन से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गुरूवार को पण्डित हरिओम नारायण पटैरिया अयोध्याधाम ने कृष्ण की बाल लीलाओं का बडे मार्मिक ढंग से वर्णन किया जिसे श्रोताओं ने अभिभूत होकर सुना।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गांव में 24 दिसम्बर को छानी अहीर में रोड के किनारे प्रांगण में श्रीमद् भागवत चल रही है। इसमें कथा वाचक हरिओम नारायण पटैरिया ने बताया कि कृष्ण भगवान के साक्षात अवतार थे। उन्होंने माखन चोरी की लीला दिखाई। कन्हैया द्वारा माखन चोरी से आशय यह है कि भगवान बृजवासियों के अनन्य पे्रमी हो गये। गोपियां उनकी बंशी की धुन सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाती थी। रास रचाती थी। राधा का कृष्ण से अटूट पे्रम था।
कथा वाचक ने श्रोताओं को कथा के माध्यम से बताया कि निश्छल भाव वाला ही भगवान को प्रिय है जबकि अभिमान, घंमंड भगवान का भोजन है। जिस व्यक्ति ने घंमंड से ईश्वर को भजा ईश्वर अपनी भक्ति उसे कभी नहीं दे सकते थे। ईश्वर को भाव प्रिय है। सबरी के जूठे बेेर भगवान ने चाव से खाये। विदुर की पत्नी ने केले छिलके भाव व पे्रम से खिलाये तो भगवान भक्षण कर गये लेकिन दुर्योधन की मेवा त्याग दी थी। इसी तरह से कृष्ण ने कई लीलाओं को दिखाकर एहसास कराया कि भगवान भाव के भूखे हैं अन्य किसी के नहीं। कथा के उपरांत पारीक्षित टीकम भदौरिया और उनकी पत्नी सीता भदौरिया ने श्रोताओं को आरती कराकर प्रसाद का वितरण किया। रात में यहां राम लीला का मंचन हुआ। 30 दिसम्बर को श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर विशाल भण्डारे का आयोजन किया जायेगा।







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