सवित्रीबाई फुले ने खोले महिलाओं के लिये शिक्षा के द्वार, जयंती पर उनके योगदान का आॅल आरक्षित शिक्षकों द्वारा कृतज्ञ स्मरण


उरई। आॅल आरक्षित टीचर वैलफेयर एसोसियेशन की जिला इकाई ने मंगलवार को राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले की जयंती पर एक संगोष्ठी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष सुन्दर सिंह शास्त्री के आवास पर आयोजित की गयी। सुन्दर सिंह शास्त्री ने इस अवसर पर अपने प्रस्तावना वक्तव्य में बताया कि सावित्रीबाई देश की प्रथम महिला शिक्षिका के रूप में इतिहास की धरोहर हैं। कायदे से उन्हीं के जन्म दिन को शिक्षक दिवस माना जाना चाहिये। कम से कम उनकी जयंती बहुजन शिक्षक दिवस के रूप में ही मनायी जानी चाहिये ताकि आने वाली पीढी को उनके योगदान का पता चल सके और आने वाली पीढिया इससे पे्ररित हो सकें।
       अन्य वक्ताओं में संगठन के प्रदेश सचिव राजेन्द्र चैधरी ने बताया कि उन्हें वंचितों और लडकियों के लिये शिक्षा के द्वार खोलने पर कितना तिरस्कार झेलना पडा। एसोसियेशन के प्रभारी जिलाध्यक्ष दीपक चैधरी, महामंत्री पे्रमकुमार कुशवाहा, कोषाध्यक्ष भूरी देवी और उपाध्यक्ष गोमती देवी, मोहम्मद परवेज आदि ने भी उनके संघर्ष की गाथा सुनायी। सुनीलदत्त चैधरी , पुनीत भारतीय, प्रवेन्द्र पाल सिंह , राजेन्द्र सिंह आदि ने शिक्षिकों से गरीब व कमजोर बच्चों को पूर्ण मनोयोग से शिक्षा देने का आवाहन किया। भगवतीशरण , बृजेश गौतम, साधना सिंह, किरन चैधरी , अनुराधा कठेरिया, सुभाष चन्द्र गौतम , रविकुमार, सुनील कुमार, अभिषेक कुमार वर्मा, पवन वर्मा, दीनदयाल श्रीवास , अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।

Leave a comment