उरई। कदौरा थाने के मरगांया गांव के मन्दिर से 28/29 दिसम्बर की रात अष्टधातु की मूूर्तियां चोरी कर ली गयी थी जिनकी कीमत ढाई करोड रूपये से अधिक बताई जाने के कारण जिले भर में सनसनी फैल गयी थी और पुलिस प्रशासन में हडकंप मच गया था। पुलिस अधीक्षक रविकुमार ने इसके त्वरित खुलासे के लिये थाना पुलिस की मदद हेतु एसओजी और सर्विलांस की टीमों को भी उसके साथ जुटा दिया था। आखिर यह कवायद रंग लायी और लगभग 11-12 दिन बाद सोमवार को इस सिलसिले में एक महिला सहित चार लोगों को पक्के साक्ष्यों के साथ पकड लिया गया जिनकी निशानदेही पर चोरी गयी मूर्तियां भी बरामद हो गयी हैं।
पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने अपने कार्यालय में मीडिया कर्मियों के सामने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुये बताया कि आरोपितों ने अवगत कराया है कि घटना के दिन वे लोग मंदिर की जमीन नगद में जोतने की बात करने के बहाने पुजारी से मिले थे और रात में जानबूझकर मंदिर में ही रूक गये थे। फिर जब पुजारी सो गया तो उन्होंने ताला तोडकर उक्त मूर्तियां उठा ली और मोटर साईकिल से भाग निकले। उन्हें जो खबर थी उसके कारण यह अंदाजा लगाया था कि मूर्तियों के अन्दर हीरे जवाहरात भरे हैं लेकिन तब उनको हाथ मलकर रह जाना पडा जब उन्होंने दो मूर्तियों को काटकर देखा जिनमें कुछ नहीं निकला नतीजतन निराश होकर हमने उक्त मूर्तियों को पांडु नदी में फैक दिया था।
गिरफ्तार किये गये आरोपितों के नाम पुलिस अधीक्षक ने स्वतंत्र प्रताप सिंह उर्फ राजा निवासी चिरली थाना सांड जनपद कानपुर देहात , शशंाक ठाकुर निवासी ग्राम मलासा थाना भोगनीपुर जनपद कानपुर देहात , लक्ष्मी निवासी नरवल थाना नरवल जनपद कानपुर नगर और सोमचन्द्र जायसवाल निवासी गोपाल नगर थाना विधनू जनपद कानपुर देहात बताये हैं। इनके कब्जे से लक्ष्मण जी की एक कटी हुयी मूर्ति , एक मूर्ति रांगा की गली हुयी , तीन मोबाइल फोन व जिस मोटर साईकिल से घटना के बाद यह लोग फरार हुये थे उसे भी बरामद कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपितों में लक्ष्मी और स्वतंत्र प्रताप के खिलाफ पहले भी चोरी के केस दर्ज रहे हैं। पुलिस अधीक्षक रविकुमार ने खुलासे पर कदौरा के प्रभारी निरीक्षक उमाकांत ओझा के साथ सर्विलांस प्रभारी योगेश पाठक व एसओजी टीम को बधाई देते हुये उनकी पीठ थपथपायी है।







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