आरके दफ़्तर की मनमानी,5 साल से परेशान आरएसएस पदाधिकारी

👉2017 में सयुंक्त रूप दो लोगों के नाम से बैनामा कराया

👉दाख़िल ख़ारिज में एक नाम चढ़ाया,दूसरे के लिए 5 साल से दे रहे प्रार्थना पत्र

👉दो दर्जन से ज्यादा प्रार्थना पत्र  और दो तहसीलदार बदलने के बाद भी नहीं हो सका काम

👉आरके दफ्तर में तैनात लेखपाल संदीप पर मनमर्जी का आरोप

माधौगढ़-उरई \-कहने को आमजन की शिकायतों को दूर करने के लिए जन चौपाल, संपूर्ण समाधान दिवस और तमाम प्रकार के आयोजन शासन द्वारा कराए जा रहे हैं लेकिन फौरी तौर पर किसी भी फरयादी को मदद मिलना संभव नहीं हो पाता है। इसके पीछे का कारण कर्मचारियों की मनमर्जी,हठधर्मिता और जेब गर्म ना होना प्रमुख होता है। यही कारण है कि माधौगढ़ तहसील के आर के दफ्तर में भ्रष्टाचार का इतना बोलबाला है कि तीन तहसीलदार के आदेशों के बाद भी आर एस एस पदाधिकारी का काम नहीं हो सका। आर के दफ्तर में तैनात लेखपाल संदीप की हठधर्मिता और बदजुबानी इस कदर है कि उन्हें न तहसीलदार के आदेश की परवाह है और न जिले के जिलाधिकारी का डर।

दाख़िल ख़ारिज में एक नाम दर्ज कराने के लिए 5 साल से काट रहे  चक्कर

मामला ऊमरी माधौगढ़ के निवासी आरएसएस के खंड कार्यवाह गोविंद सिंह से जुड़ा हुआ है। जिन्होंने वर्ष 2017 में सुरेश,दिनेश और रामश्री आदि से गाटा संख्या 172 में 0.668 रकबा का बैनामा अपनी पत्नी ममता और छोटे भाई की पत्नी कोमेश पत्नी राघवेन्द्र के नाम कराया। लेकिन सरकारी कार्यलय की मनमर्जी से दाख़िल खारिज सिर्फ ममता के नाम दर्ज किया गया। एक नाम कोमेश का दर्ज नहीं किया गया। उसके बाद गोविंद सिंह ने दो दर्जन से ज्यादा प्रार्थना पत्र,तहसील दिवस में शिकायत के अलावा व्यक्तिगत तौर पर तत्कालीन तहसीलदार प्रेमनारायण प्रजापति,सुशील सिंह और वर्तमान तहसीलदार ब्रजेन्द्र कुमार गुप्ता को प्रार्थना पत्र दिया फिर भी नाम दर्ज तो दूर फ़ाइल तक मिल सकी। आरके दफ़्तर में फाइल मंगाने के नाम पर  300 रुपये तक लिए गए हैं। गोविंद सिंह ने आरोप लगाया कि आरके दफ्तर में तैनात लेखपाल संदीप कुमार अपने ऊपर ज्यादा लोड होने की बात कहकर काम नहीं करना चाहते या कार्यालय में भ्र्ष्टाचार के कारण कोई कार्य करने में रुचि नहीं ले रहा है। 

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