उरई। जिला महिला अस्पताल में मंगलवार से स्किल बर्थ अटेडेंट के 5 दिवसीय प्रशिक्षण की शुरूआत करते हुये जिलाधिकारी चांदनी सिंह ने चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को रोगियों के साथ संवेदनशीलता के व्यवहार की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि मरीजों का इलाज निर्धारित प्रोटोकोल के अनुसार करें और उनकी बात गौर से सुनंे। उन्होंने कहा कि जज्चा बच्चा के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल से प्रसव की जटिलताओं और मातृ शिशु मृत्यु को कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 एनडी शर्मा ने बताया है कि स्टाफ को दक्ष बनाकर माता एवं शिशु के लिये जोखिम को कम किया जा सकता है। यह प्रशिक्षण इसी मकसद से आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षणदाता के रूप में स्त्री रोग विशेषज्ञ डा0 अशोक कुमार सिंह , बाल रोग विशेषज्ञ डा0 एसके पाल , नर्स मेंटर प्रज्ञा सचान , स्टाफ नर्स रागिनी उपाध्याय और आरती देवी ने भी अहम टिप्स दिये। जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा0 एनआर वर्मा ने बताया कि यह 21 दिवसीय प्रशिक्षण है। इसमें 5 दिवसीय व्याख्यान होगें। इसके बाद 16 दिन काम के दौरान होने वाले जोखिम को रोकने की व्यवहारिक टेªनिंग दी जायेगी। महिला अस्पताल के अलावा कोंच , कदौरा, नदीगांव, डकोर और बाबई स्वास्थ्य केन्द्रों की स्टाफ नर्स भी प्रशिक्षण में शामिल की गयी।
इस दौरान डीआईओ डा0 वीरेन्द्र सिंह , जिला अस्पताल के सीएमएस डा0 अविनेश कुमार, डा0 संजीव प्रभाकर , डीपीएम प्रेमप्रताप , डा0 अंकुर , डा0 आशीष कुमार झां आदि मौजूद रहे।







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