बसपा , सपा ने उत्पीडन एक्ट की धाराओं को कर दिया था लचर , मोदी सरकार ने किया सशक्त

 उरई| भाजपा के राज्यसभा सांसद और एससी एसटी आयोग उत्तर प्रदेश के पूर्व चेयरमैन बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए दलितों के नाम पर विलाप करने वाली सपा और बसपा की सरकारों ने दलित उत्पीडन रोकने की व्यवस्थाओं को पंगु बना दिया था जबकि मोदी सरकार ने इससे जुड़े क़ानून,  नियमों को सशक्त किया है |

उन्होंने उदाहरण दे कर बताया कि मायावती सरकार ने सिर्फ ह्त्या , रेप के मामलों में ही एस सी एक्ट लगाने का फरमान जारी कर दिया था जिससे आम उत्पीडन की स्थिति में दलितों को मुआवजा बंद हो गया था लेकिन मोदी सरकार ने परम्परागत दलित उत्पीडन के अलावा दलित बालिकाओं के मामले में देवदासी प्रथा आदि को भी एस सी एक्ट के दायरे में पहुंचा दिया | स्थानीय निकाय और पंचायती सुरक्षित सीटों पर दबंग डमी प्रत्याशी चुनवा लेते हैं जिसे रोकने के लिए इस वर्ग के चुनाव में किसी की उम्मीदवारी  रोकने, प्रतिकार कर चुन जाने वाले प्रत्याशी के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार और इस वर्ग के चुने हुए उम्मीदवार को काम करने से रोकने पर भी ऍस सी एस टी एक्ट लगाया जा सकता है | इसी तरह  कमाऊ दलित की ह्त्या होती है  तो  उसकी विधवा को ₹5000 प्रतिमाह पेंशन और टी ए डी र देने का प्रावधान किया गया है जिसमें कर्मचारियों की तरह उसे महंगाई बढ़ने पर डे में वृद्धि का लाभ मिलेगा | इसके अलावा उस परिवार के बच्चो को ग्रेजुएट होने तक मुफ्त शिक्षा और उस परिवार को 3 माह तक मुफ्त राशन देने की भी व्यवस्था है   | एक सवाल के जवाब मे बृजलाल ने कहा कि एससी एसटी एक्ट 1989 में  1 जून 2016 के  पहले  22 कानून हुआ करते थे 2016 में उनमें 25 नए कानून बढ़ाकर कुल 45 कानून कर दिए गए | पहले दलित महिला को छूने,  मारपीट , गाली गलौज आदि पर हल्की धाराओं पर मुकदमे लिख लिए जाते थे लेकिन अब दलित उत्पीड़न के मुकदमे लिखे जाते हैं | उन्होंने कहा कि दलित हितों की फ़िक्र वर्तमान सरकार  से ज्यादा किसी सरकार ने नहीं की |

Leave a comment