जालौन में गौशालाओं के सुचारू संचालन के लिये शासन  के नोड्ल अधिकारी ने डीएम चांदनी सिंह को सराहा


उरई। जालौन जिले की गौशालाओं का हाल जानने के लिये शासन द्वारा तीन दिवसीय भ्रमण पर भेजे गये भाषा और संस्कृति विभाग के विशेष सचिव आनन्द कुमार आईएएस ने अपने दौरे को पूरा करने के बाद अनौपचारिक रूप से पत्रकारों को बताया कि जिले की 419 कुल गौशालाओं में से 125 ऐसी हैं जहां बरसात में गौवंश की सुविधाजनक व्यवस्था के लिये खण्डजा बिछाये जाने की जरूरत है। इतनी ही गौशालाओं में गौवंश की प्यास बुझाने की मुकम्मल व्यवस्था के लिये चरही बनाई जानी चाहिये। इस बाबत शासन और जिला प्रशासन से लिखा पढी की गयी है।
      उन्होने कहा कि समूचे बुन्देलखण्ड में सबसे ज्यादा गौशालायें जालौन जिले में संचालित हैं जिनमें 38988 गौवंशो को सुरक्षित आश्रय मिल रहा है। उन्होेने कहा कि गौवंश के लिये गौसफारी बनाने के जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर भी शासन गम्भीरता से दौर कर रहा है। उन्होने कहा कि इस जिले की डीएम चांदनी सिंह वर्तमान राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट गौवंश की सुरक्षा के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम कर रही हैं। इस दिशा में गांव गांव में गौशालायें स्थापित कराने के अलावा चार मेंगा गौशालायें भी बनवाई जा रही हैं।
      तीन दिन के दौरे में विशेष सचिव आनन्द कुमार ने जिले की दो दर्जन से अधिक गौशालाओं का निरीक्षण किया उन्होने कहा कि । अधिकांश गौशालाओं में हरा चारा की व्यवस्था है जिसमें किसानों द्वारा भेजे जा रहे हरी मटर की फलियों के छिलके शामिल है जिससे गौवंश के सामने भुखमरी जैसा कोई खतरा नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होने कहा कि इससे अन्ना गौवंश अधिकांशतः गौशालाओं में सुरक्षित है और किसानों के खेतों में लहलहाती फसलें सुरक्षित बनी हुयी हैं। पत्रकार वार्ता में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी हरेन्द्र सिंह , परियोजना अधिकारी डीआरडीए डा0 शिवकांत द्विवेदी और समाजसेवी चैधरी जयकरन सिंह उपस्थित रहे।


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