जालौन-उरई । प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए डूडा कर्मचारियों पर दलालों के माध्यम से सुविधा शुल्क लेने के आरोप लग रहे हैं। सुविधा शुल्क न मिलने पर पात्रों को भी अपात्र बनाने में संकोच नहीं किया जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं। नगर के लोगों ने मामले की जांच कराने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि प्रत्येक नागरिक के पास पक्का घर हो। इासके लिए जो लोग पक्के आवास से वंचित हैं उनके लिए सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही है। नगरीय विकास अभिकरण संस्थान (डूडा) द्वारा उक्त योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना का लाभ पाने के लिए आवेदकों की जांच राजस्व विभाग की टीम के साथ डूडा के कर्मचारियों द्वारा की जाती है। जिसमें डूडा के 2 जेई द्वारा जांच की जाती है। जिसमें लाभार्थी के प्लाट से लेकर मकान बनने तक की फोटो अपडेट की जाती है। लाभार्थियों को आवास बनवाने के लिए 3 किस्तों में धनराशि दी जाती है। लोगों का आरोप है कि आवेदकों को योजना का लाभ दिलाने के लिए नगर में कुछ दलाल सक्रिय हैं। डूडा कर्मचारी इन्हीं दलालों से मिलकर आवेदकों से 20 से 50 हजार रुपये तक सुविधा शुल्क वसूलते हैं। सुविधा शुल्क न मिलने पर पात्रों को भी अपात्र बनाकर योजना से वंचित कर दिया जाता है। उक्त संदर्भ में रमेशचंद्र, अधिवक्ता उमेश दीक्षित, पुष्पेंद्र सिंह, दीपक शर्मा आदि ने डूडा कर्मचारियों की भ्रष्टाचार के मामले की जांच कराने की मांग जिलाधिकारी से की है। जिससे सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मंशा पूरी हो सके और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सके।

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