माधौगढ़-मोदी योगी शासन भ्रष्टाचार मुक्त होने के लाख दावे करें लेकिन हकीकत में फर्जीवाड़ा आसमान छू रहा है, खासकर विकास की योजनाओं में तो भ्रष्टाचार के जो पंख लगे हैं,वह तो इस शासन की पोल खोलते हैं। मनरेगा योजना में इतना भ्रष्टाचार इसके पहले कभी नहीं देखा गया। कि मृत हो चुके लोगों के भी जॉब कार्ड भरे जा रहे हैं। काम को फर्जी दिखा कर भुगतान कराना या मजदूरों की बजाए ट्रैक्टर और जेसीबी से काम करना, यह तो आम बात थी। लेकिन जो मजदूर कई साल पहले मृत हो चुके हैं। उनके भी जॉब कार्ड भर दिए जाएं, यह तो आश्चर्य का विषय है। फिर भी अधिकारी मौन होकर अपना फीलगुड कर रहे हैं।

मामला माधौगढ़ ब्लॉक के अतरेंहटी गांव का है,जहां कमल सिंह पुत्र हरदयाल की मृत्यु 16. 12.2020 को हो गई। फिर भी उनके जॉब कार्ड संख्या 29 में डामर रोड से वीरपाल के खेत तक चकबन्ध के काम में जारी मस्टरोल संख्या 6634 में,जो 18 सितंबर 2022 को जारी हुआ। उसमें 23.11.2022 को 2769 रुपया खाते में मजदूरी का भुगतान कर दिया गया। जो व्यक्ति 2 वर्ष पहले ही मृत हो चुका है,उसे भी मजदूर बनाकर फर्जीबाड़ा किया जा रहा है। जिसकी शिकायत भी की गई। लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई। ऐसा ही मामला नदीगांव ब्लॉक के बरगुवां का है,जहां 11 साल पहले मृत हो चुके मजदूर का भी जॉबकार्ड भर दिया गया। मजदूर बिजली करंट से 11 साल पहले मृत हो गया। फिर भी उसका जॉब कार्ड यूपी 38-005-007-001/134 को एमआर 9147 में 24 सितंबर से 7 अक्टूबर 2019 तक मजदूरी दिखाकर रुपया भुगतान किया गया। जिस पर भी शिकायत हुई लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्यवाही न हुई। ऐसे में मनरेगा एक्ट की कैसे धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

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