प्रिन्स द्विवेदी
माधौगढ़- नगर पंचायत माधौगढ़ का चुनाव जातीय समीकरणों में उलझा हुआ नजर आ रहा है। सबसे बड़ी बात इतने बड़े नगर में सत्ताधारी दल सहित अन्य प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में गिने-चुने नाम ही उम्मीदवारों की लिस्ट में शुमार किए जा रहे हैं ऐसा लग रहा है कि जैसे बहुत अच्छे लोगों में चुनाव को लेकर उत्साह और उमंग नहीं है। सत्ताधारी दल में मिले-जुले समुदायों से उम्मीदवार हैं तो समाजवादी पार्टी से सिर्फ क्षत्रिय उम्मीदवार ज्यादा मजबूती से टिकट मांग रहे हैं। ताज्जुब की बात है कि प्रदेश में मृतप्राय अवस्था में होने के बाद भी बहुजन समाज पार्टी से नगर पंचायत के चुनाव में सबसे ज्यादा प्रत्याशियों की गिनती है। वह भी ब्राह्मण सबसे ज़्यादा।
दो बार से लगातार प्रदेश की सत्ता में काबिज होने और पिछले नगर पंचायत चुनाव में भाजपा की भारी जीत होने के बाद भी पार्टी में सिर्फ निर्वतमान चेयरमैन और आनंद गुप्ता वैश्य समुदाय से हैं,जबकि ब्राह्मण से राघवेंद्र व्यास और क्षत्रिय समुदाय से सुनील तोमर मजबूत दावेदार हैं। जबकि समाजवादी पार्टी से विष्णु प्रताप सिंह और दीपा सिंह में टिकट को लेकर रस्साकसी है। विष्णु प्रताप सिंह पिछला चुनाव निर्दलीय लड़ चुके हैं। राजनीतिक ताकत के लिहाज से नेपथ्य में लेकिन वोट बैंक में मजबूत बहुजन समाज पार्टी अभी भी प्रत्याशियों की पहली पसंद है। खासकर ब्राह्मण वर्ग में सबसे ज्यादा प्रत्याशिता देखने को मिल रही है। पिछला चुनाव मजबूती से लड़े आलोक मिश्रा,अरुण पालीवाल,अनिल पालीवाल,अवधेश मिश्रा,राघवेन्द्र उर्फ गुड्डू मिश्रा और मध्य प्रदेश में सरकारी सेवारत अनिल मिश्रा अपनी पत्नी के लिए बसपा में मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं। अभी भी नगर में बसपा का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। पिछला चुनाव बसपा तीन ब्राह्मण प्रत्याशियों के खड़े होने की वजह से हार गई थी। बसपा में वैश्य समुदाय से रघुवीरशरण महतेले उर्फ़ राजू महतेले का नाम भी चल रहा है।बसपा से ब्राह्मण या वैश्य किसी का भी टिकट हो चुनाव कांटे का होगा। अनूप गुप्ता,शम्भू सिंह,नरेश राठौर भी भाजपा,बसपा और सपा से दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन जाति संतुलन के हिसाब से राजनीतिक दलों ने टिकट दिया तो ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य के बीच में जबरदस्त चुनावी सूचकांक बढ़ेगा।







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