अंकित कस्तवार
माधौगढ़- सत्ताधारी दल भाजपा का दुर्भाग्य! देखिए कि नगर पंचायत माधौगढ़ में वैश्य समुदाय से उसके पास कोई निर्विवाद चेहरा नहीं है। जिसको वह टिकट थमा कर चुनाव की वैतरणी को पार कर सके। वैश्य समाज से दो उम्मीदवार हैं। जिनके ऊपर दागों की लंबी फेहरिस्त है। इस बीच एक नए चेहरे ने कुछ उम्मीद बढ़ाई है लेकिन वह अभी पार्टी में मजबूत नहीं है लेकिन विकल्प के तौर पर सभी प्रत्याशियों से भारी है।
पिछली बार एक तरफा नगर की जनता ने वैश्य बिरादरी के निर्वतमान अध्यक्ष को भारी वोट दिया था लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान उनका जनता से संवाद न करना,विकास कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार और गौशाला में कई गायों के मरने में लापरवाही के आरोप लगे थे। इसके अलावा भाजपा कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर सिर्फ ठेकेदारों पर निर्भर रहने से छवि खराब हुई है। नगर में पार्टी आलाकमान के सामने आम कार्यकर्ता और जनता ने सीधा विरोध किया। इसके अलावा आनंद गुप्ता उर्फ बंटी नेता जो ठेकेदार है, उनके ऊपर भी अभी हाल में दलितों के खिलाफ पोस्टर वायरल होने का मामला सोशल मीडिया में चल रहा है। ऐसे में पार्टी को चुनाव में नुकसान ना हो यह देखना बहुत जरूरी होगा। ऐसे में पार्टी के पास में एक तीसरे नाम अंकित कस्तवार पर विचार करना पड़ सकता है लेकिन वह पार्टी में तो परिचय के मोहताज हैं, पर नगर की आम जनता में गहरी पैठ है। सराफा व्यवसाई होने के कारण आर्थिक रूप से संपन्न है और ज्यादातर परिवारों में अंदर तक निकटता है। जिसका फायदा पार्टी को मिल तो सकता है लेकिन भाजपा छोटे से कार्यकर्ता पर कितना भरोसा जताती है। यह देखने वाली बात होगी। जिस प्रकार वैश्य समुदाय से दोनों प्रत्याशियों के ऊपर दाग हैं तो ऐसे में तीसरे विकल्प पर विचार करना मील का पत्थर भी साबित हो सकता है।







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