उरई।
क्रय विक्रय सहकारी समिति कालपी के पदाधिकारियों का निर्वाचन निर्विरोध सम्पन्न हो गया है। इसमें हरदिल अजीज व्यक्तित्व रहे स्व0 सोमेन्द्र सिंह कुक्कू भइया के सुपुत्र सोमेश को सभी की सहमति से सभापति और उदय प्रताप को उप सभापति चुन लिया गया है।
चुनाव निर्वाचन अधिकारी रामकुमार और सहायक निर्वाचन अधिकारी दिलीप पटेल की देखरेख में कराया गया। उक्त पदाधिकारियों के अलावा शीर्ष सहकारी संस्थाओं में भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों का भी निर्विरोध चुनाव हुआ। सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री डा0 प्रवीण सिंह जादौन की देखरेख में चुनाव के लिए पहले सभी डेलीगेट भाजपा के कालपी कार्यालय में एकत्रित हुए और इसके बाद संगठित रूप से क्रय विक्रय समिति पहुंचे। सम्भावित पदाधिकारियों को लेकर पहले से आमराय बना ली गयी थी। तद्नुसार उन्होंने तत्काल नामांकन दाखिल किये। इस बीच अपरान्ह 01 बजे नामांकन के लिए निर्धारित अंतिम समय तक कोई दूसरे नामांकन नहीं हुए नतीजतन सोमेश सिंह जादौन को सभापति और सहकार भारती के सह संयोजक उदय प्रताप सिंह को उप सभापति घोषित कर दिया गया। प्रदेश शासन द्वारा आटा के जितेन्द्र कुमार पाण्डेय को संचालक नामित किया गया। जबकि पिछडे वर्ग से अटराकला के राम अनुग्रह गुर्जर व महिला वर्ग में कुटरा की शिव देवी संचालक नामित हुयी।
शीर्ष सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि के बतौर प्रदेश सहकारी फैडरेशन के लिए पूर्व विधायक नरेन्द्र पाल सिंह जादौन, प्रदेश सहकारी यूनियन के लिए राम मोहन चतुर्वेदी , इफको एवं कृभको के लिए रसाल सिंह चैहान जिला सहकारी बैंक उरई के लिए देवेश कुमार चतुर्वेदी, धर्मेन्द्र सिंह, विनायक सिंह, जिला सहकारी फैडरेशन के लिए राघवेन्द्र सिंह, अशोक कुमार सिंह, हरगोविन्द सिंह, उदयप्रताप सिंह, राम अनुग्रह सिंह और उ0प्र0 तिलहन सहकारी संघ के लिए सचित सिंह के नाम तय किये गये।
इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी के नगर अध्यक्ष अमित पाण्डेय, सहकार भारती के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राजावत, जिला महामंत्री श्यामकरन प्रजापति, जिला पंचायत सदस्य ज्ञान सिंह भदौरिया, पवन सिंह चैहान, अतुल सिंह चैहान, अभिषेक सिंह परिहार, उद्देश्य तिवारी, विजय सिंह जादौन, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, हरगोविन्द सिंह चैहान, अशीष कुमार चतुर्वेदी, क्रय विक्रय सहकारी समिति कालपी के संचालक ग्यादीन प्रजापति, विनायक सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, शिवदेवी, शीला, करूणादेवी, सचिव प्रदीप कुमार दुबे आदि उपस्थित रहे।







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