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उरई।
बाबा साहब डा0 अम्बेडकर की टक्कर का अर्थशास्त्री पूरी दुनिया में पैदा नहीं हुआ। उन्होंने अपनी थीसिस में प्राचीन भारत में देश के वाणिज्य की स्थिति पर प्रकाश डाला था। जिससे पता चलता है कि अंग्रेजों के आने के पहले भारत का उद्योग व्यापार किस तरह सारी दुनिया में छाया हुआ था। उन्होंने भारत को सोने की चिडिया कहे जाने के मुहावरे की सत्यता को प्रमाणित कर दिया था। लेकिन उनके एक ही पक्ष की चर्चा होती है। दूसरे पक्षों की नहीं। जबकि आज देश और समाज को उनके बहुआयामी विचारों से लाभान्वित किये जाने की आवश्यकता है।
यह बात वयोवृद्व प्रगतिशील चिन्तक रामकृष्ण शुक्ला ने बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में कोंच बस स्टैण्ड के पास कैलाश पाठक की बगिया में आयोजित कार्यक्रम में कहीं। डीवी काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डा0 अरूण श्रीवास्तव ने कहा कि बाबा साहब के बारे में जबानी जमा खर्च करने से काम चलने वाला नहीं है। उनके विचारों के अनुरूप किसी को भी जाति के कारण नीचा या अछूत समझने की भावना का परित्याग अमल में दिखाना होगा। असिस्टेन्ट प्रोफेसर डा0 राम प्रताप सिंह ने धर्म की राजनीति के खतरे को लेकर बाबा साहब के विचारों की आज के दौर में अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रासंगिकता निरूपित की। इप्टा के अध्यक्ष देवेन्द्र शुक्ला ने कहा कि बुनियादी संसाधनांे के राष्ट्रीयकरण की डा0 अम्बेडकर की तजबीज पर ध्यान देने का समय एक बार फिर आ गया है। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि आज के दिन सफाई कर्मचारियों को अवकाश देकर अपने मसीहा के जन्मदिन का जश्न मनाने की आजादी दी जानी चाहिए थी जबकि उन्हें आज भी सुबह से सडक व नालियों की सफाई के काम में बदस्तूर लगे देखा गया। बार संघ के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द गौतम चच्चू ने कहा कि बाबा साहब की लोकतंत्र और संवैधानिक शासन में दृढ आस्था थी। सत्ता पाकर तानाशाही आचरण बाबा साहब के विचारों से विश्वासघात है। पूर्व विधायक संतराम कुशवाहा, कामरेड राम सिंह, श्रद्वा चैरसिया, रोहित त्रिपाठी, विनोद वर्मा ने भी विचार प्रकट किये।
कामरेड गिरेन्द्र सिंह, लाल सिंह निरंजन, डा0 जयकरन सिंह, डा0 राकेश द्विवेदी, अशोक द्विवेदी, पत्रकार सुनील शर्मा, जयदेव यादव, शशिकान्त शर्मा, भाकपा के जिला सचिव विनय पाठक, शशिकान्त शर्मा, जितेन्द्र यादव फौजी, कुलदीप चतुर्वेदी, धर्मेन्द्र सिंह, डा0 माया सिंह, कृपाराम कृपालु, आदि उपस्थित रहे।








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