उरई. पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ने ऊहापोह ख़त्म करके आखिर अपनी मां की बसपा के सिम्बल पर नगर पालिका के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए उम्मीदवारी कराने का फैसला लिया है. बीती रात बसपा के बुंदेलखंड प्रभारी लालाराम गौतम ने कालपी रोड स्थित एक लक्सरी होटल में पत्रकारों को गिरिजा चौधरी की उम्मीदवारी पर मुहर लगाने की घोषणा कर दी.
विजय चौधरी नगर पालिका चुनाव के पुराने खिलाड़ी हैं.वे 2000 से 2005 तक नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं.2012 में अनुसूचित जाति महिला के लिए सुरक्षित होने पर उन्होंने अपनी मां को उम्मीदवार बना दिया था. जिसमें वे फिर सफल रहे थे.
इस बार उन्होंने फिर जोर आजमायश का निश्चय कर लिया था. यहां तक कि अगर अध्यक्ष पद अनारक्षित हो जाता तो भी वे चुनाव लड़ने का इरादा किया था. विकास की उनकी शैली का मुरीद मतदाताओं का एक वर्ग उन्हें अनिल बहुगुणा के समय से ही उन्हें इसके लिए उत्साहित कर रहा था.
उरई पालिका का अध्यक्ष पद फिर अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित होते ही अपनी मां के माध्यम से वे चुनाव लड़ने की व्यूह रचना में संलग्न हो गए थे.
शुरू में मुस्लिम वोट बसपा से छिटका नजर आ रहा था जो कि विजय का एक बड़ा आधार है. इसलिए वे असमंजस में थे. तब उनकी रणनीति निर्दलीय दांव लगाने की थी लेकिन बसपा ने नगर निकाय चुनाव की उम्मीदवारी तय करने के लिए जो ताना बाना बुना उसमें इस चुनाव के लिए मुसलमानों के बीच उसके फिर मीर बनने के आसार पैदा हो गए हैं.इसलिए विजय को अपनी पुरानी पार्टी की ही शरण में जाना सुभीते का लगा.
लालाराम अहिरवार ने गिरिजा चौधरी के अलावा कालपी से मशहूर दीवान खानदान के अतीक सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है.







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