उरई।
17 वर्ष से लापता विवाहिता की गुमशुदगी का मामला 17 वर्ष बाद पुलिस की ईमानदार कोशिशों के चलते सुलझ गया। प्रकाश में आये तथ्यों केे मुताबिक युवती की उसके पति और चचिया ससुर ने मिलकर दहेज हत्या की थी। पुलिस ने दोनों आरोपी गिरफ्तार कर लिये है। जिन्होंने अपना जुर्म कबूल कर हत्या में प्रयुक्त सरिया आदि पुलिस को बरामद करा दिया।
इतने पुराने मामले का खुलासा करने का श्रेय क्षेत्राधिकारी नगर गिरजा शंकर त्रिपाठी को दिया जा रहा है। मृतका मंजू के भाई विष्णु सेन निवासी मुहल्ला राजेन्द्र नगर उरई ने गत 17 अप्रैल को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना-पत्र देकर अपनी बहिन की 17 वर्षो से गुमशुदगी की शिकायत करते हुए उसके पति पर उसके साथ अनहोनी करने की आशंका जताई थी। तदनुसार पुलिस अधीक्षक इराज राजा ने नगर क्षेत्राधिकारी गिरजाशंकर त्रिपाठी को इसकी जांच गहनता से करने के निर्देश के साथ सौप दी। पुराना मामला होते हुए भी एक युवती की जिन्दगी से जुडा मुद्दा होने के कारण सीओ ने इसकी जांच काफी गम्भीरता से की। इस दौरान उन्हें पता चला कि मन्जू के पति सन्तोष निवासी मु0 इन्द्रानगर उरई ने किसी को यह बताया है कि उसने अपनी पत्नी को मायके से अतिरिक्त दहेज न लाने के कारण 31 दिसम्बर 2006 को कालपी में कब्रिस्तान के पास लोहे के सरिया से प्रहार करके मार डाला था। बारदात में उसने अपने चाचा रामहेत को भी शामिल बताया। जो इन्द्रानगर मुहल्ले के निवासी है। घटना के समय जब उसने मंजू को मौत के घाट उतारने के लिए उस पर सरिया से ताबडतोड वार किये। उस समय रामहेत ने वह छूटकर भाग न पाये इसके लिए उसके दोनों हाथ पकड लिये थे।
इस खबर पर गिरजाशंकर त्रिपाठी ने संतोष को पकडवा लिया और उससे कडाई से पूछताछ की तो उसने पूरी बारदात कबूल कर ली। उसकी निशान देही पर वह सरिया भी बरामद कर लिया गया। जिससे हत्या को अंजाम दिया गया था। संतोष के साथ उसके चाचा रामहेत को भी दबोच लिया गया है। संतोष के एंडरोड मोबाइल में भी उसकी करतूत के सबूत दर्ज है। जिसे कब्जे में ले लिया गया है। बताया जाता है कि संतोष की मृतका मंजू दूसरी पत्नी थी। उसकी पहली शादी 15 वर्ष की उम्र डकोर थाने के टिमरों निवासी रमा से हुयी थी। जो उसे एक साल बाद छोडकर चली गयी थी। इसके उपरान्त मंजू से उसने दूसरा विवाह किया। बाद में जब कई वर्षो तक वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ पाया तो उसने आश्वस्त होकर तीसरा विवाह कर लिया और ग्राम माचा थाना भोगनीपुर में अपनी नयी पत्नी के साथ रहने लगा। लेकिन जुर्म के निशान कभी मिटते नहीं है। सो इतने वर्षाे बाद उसका जुर्म सिर चढकर बोल ही उठा और अब बुढापे में वह जेल पहुंच गया है।







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