जब वैद्यगीरी के सहारे सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़े बाबूराम ने कांग्रेस नेता को दी थी कड़ी टक्कर

प्रिन्स द्विवेदी

माधौगढ़-उरई |  नगर पंचायत चुनाव के इतिहास में इतना कड़ा मुकाबला कभी न हुआ था और न होने की उम्मीद है। जब नगर में इलाज करने वाले वैद्य ने कांग्रेस के बहुत बड़े नेता को चुनाव में कड़ी टक्कर दी थी। अगर रातों-रात चुनाव को धनबल से मैनेज न किया गया होता तो 1958 में कांग्रेस का किला ढह जाता। पूरी ताकत झोंकने के बाद भी कांग्रेसी नेता ने मात्र 13 वोटों के अंतर से वह चुनाव जीत पाया था।

1958 के नगर पंचायत माधौगढ़ के चुनाव में कांग्रेस के बहुत बड़े नेता बृजलाल नेताजी चुनाव मैदान में थे। जबकि सामने आम जनता का वैद्य के रूप में इलाज करने वाले बाबूराम शर्मा वैद्यजी सोशलिस्ट पार्टी से उम्मीदवार बने। 40 वर्ष निशुल्क जनता का इलाज करने के कारण वैद्यजी जनता के चहेते हो गए। जिससे कांग्रेसी नेता बृजलाल को चुनाव में मजबूत टक्कर मिलने लगी। नगर के लक्ष्मणपुरा,गोकुलपुरवा और गोटियन टोला पूरी तरह से बाबूराम वैद्य के समर्थन में आ गए। रामचरन बरसईयां,मूलचंद इंदुरख्या,शालिगराम शिवहरे,नंदकिशोर पालीवाल जैसे प्रमुख नेताओं ने भी वैद्यजी को समर्थन देकर चुनाव को संघर्ष पूर्ण बना दिया। नगर पंचायत का चुनाव दो ध्रुवों में बंट गया। दो पाले आमने-सामने थे,उस जैसा कांटे का चुनाव शायद ही कभी हो,दोनों प्रत्याशियों के समर्थक मजबूती से साथ थे। आज की तरह झूंठ की राजनीति या दोगला तरह का समर्थन न था। 

नगर में सोशलिस्ट पार्टी का चुनाव इतना दमदार होने लगा कि कांग्रेस की साख पर बट्टा लगने जैसा हो गया। जनता का एकतरफा हुजूम और समर्थन सोशलिस्ट पार्टी की ओर झुकने लगा। अति उत्साह में बाबूराम वैद्यजी के समर्थक लतीफ ने नगर में एक बहुत बड़ा जुलूस निकाल दिया। जिसके बाद उस समय के नेता कुंवर लाल लहारिया, मनसुखलाल,रटटे मैनेजर और दो प्रमुख लोगों ने नेताजी के लिए उस जमाने में ₹5000-5000 रुपये का चंदा कर ₹25000 रुपये इकट्ठे किए। और चुनाव में धनबल का उपयोग करते हुए वैद्य जी को 13 वोटों से हरा दिया था। उसके बाद बृजलाल नेता जी 27 जनवरी 1958 से 18 नवम्बर 1964 तक नगर पंचायत अध्यक्ष रहे।

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