प्रिन्स द्विवेदी
उरई- 1902 में गठित नगर पंचायत माधौगढ़ में आजादी के पहले रामगोपाल तरसौलिया ‘मुखिया’ 1931 से 1941 तक निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। हालांकि नगर पंचायत माधौगढ़ का सरकारी रिकॉर्ड 1941 से ही मिलता है लेकिन नगर पंचायत माधौगढ़ के पहले अध्यक्ष रामगोपाल मुखिया थे। उसके बाद आनंदीलाल पालीवाल फिर शालिगराम शिवहरे और बाकी अध्यक्ष चुनाव से कुर्सी पर पहुंचते रहे। आजादी के पहले अंग्रेजी हुकूमत बिना चुनाव कराए ही अध्यक्ष का चयन कर देती थी। इसके चलते नगर के प्रसिद्ध घी व्यवसाई रामगोपाल मुखिया दो बार 10 साल तक निर्विरोध पहले अध्यक्ष बने रहे।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सम्भाली नगर पंचायत की कमान
आजादी के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का भी राजनीतिक रसूख खूब रहा। नगर पंचायत के चुनाव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे शालिगराम शिवहरे,ब्रजलाल गुप्ता नेता जी और रघुवरदयाल गुप्ता ने अपनी राजनैतिक पकड़ के चलते नगर की राजनीति में अपना दबदबा बनाये रखा। जिसके चलते 15.11.1948 से 11.11.1953 तक शालिगराम शिवहरे,27.01.1958 से 18.11.1964 तक बृजलाल गुप्ता नेता जी और रघुवरदयाल गुप्ता दो बार 25.06.1971 से 19.08.1973 तक व दूसरी बार 30.08.1975 से 13.04.1976 तक अध्यक्ष रहे।
दो अध्यक्षो के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव भी हुआ पारित,छोड़नी पड़ी थी कुर्सी
2 ही प्रत्याशियों के आमने-सामने होने से राजनैतिक गर्माहट तीव्र होती थी। जिसको राजनीति के साम-दाम-दंड-भेद वाले हथकंडे से प्रभावित किया जाता था। विद्वेष कम था लेकिन स्वास्थ्य राजनीति चरम पर थी। जून 1971 में रघुवरदयाल गुप्ता अध्यक्ष चुने गए लेकिन उनके ख़िलाफ़ अगस्त 1973 में अविश्वास हो गया। जिसके चलते कुर्सी गई। चुनाव के बाद रामस्वरूप शर्मा नवम्बर 1973 को अध्यक्ष बन गए लेकिन 19 महीने के कार्यकाल के बाद एक बार फिर से रामस्वरूप शर्मा के ख़िलाफ़ अविश्वास हो गया और एक बार फिर से रघुवरदयाल गुप्ता 8 महीने के लिए अध्यक्ष चुने गए।
पहले 3 वार्डों से चुने जाते थे 9 सदस्य,1994 के बाद हुआ आरक्षण
नगर में पहले 3 वार्डों से 9 सदस्य चुने जाते थे। एक वार्ड में जनता तीन सदस्यों को वोट देती थी। नगर तीन भागों में विभाजित था। 1994 के बाद नगर पंचायत में आरक्षण शुरू हुआ और वार्डों का परसीमन हुआ। जिसके बाद वार्ड भी बढ़ाये गए और 1995 के चुनाव से लेकर 2012 तक के चुनाव में माधौगढ़ की सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित रही।
1976 के बाद 12 वर्ष प्रशासक भी रहा तैनात
1976 के बाद नगर पंचायत का कोई चुनाव नहीं हुआ। 12 वर्ष के लिए प्रशासक नियुक्त रहा। रघुवरदयाल गुप्त के बाद कोई चुनाव नहीं हुआ। उसके बाद सीधा 1988 में चुनाव हुआ। जिसमें प्रभाशंकर पालीवाल विजयी हुए थे।






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