उरई।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ढील के कारण जिले के सुदूर क्षेत्रों के विद्यालयों के अध्यापक डयूटी पर आने की बजाय अपने घरों में आराम करते रहते है और पढने की आस लगाये बच्चों को स्कूल में ताला देखकर बेरंग वापस लौटना पडता है।
इसकी एक बानगी नदीगांव विकास खण्ड के ग्राम रानीपुरा में खोले गये प्राथमिक विद्यालय में देखी गयी। ग्रामीणों ने बताया कि इस स्कूल में 03 अध्यापक तैनात है जिनके दर्शन कभी कभार ही हो पाते है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी इस स्कूल की ओर रूख करना गवारा नहीं करते जिससे अध्यापक निश्चिन्त रहते है। इसके बावजूद अगर कभी किसी उच्चाधिकारी का रानीपुरा में निरीक्षण का कार्यक्रम बनता है तो पता नहीं किसी तरह अध्यापकों को सूचना मिल जाती है और वे उस दिन हाजिर होने की व्यवस्था कर लेते है।
अध्यापकों के इस रवैया के कारण सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों के लिए मिड-डे-मील और निःशुल्क ड्रेस उपलब्ध कराने आदि की जो योजनायें संचालित है वे भी दम तोडती नजर आती है और उनके बजट का अध्यापक व सम्बन्धित अधिकारी मिलकर बन्दर बाट करते रहते है। प्रतिवर्ष विद्यालय भवन के मेन्टीनेन्स के लिए बजट आता है इसके बावजूद यहां विद्यालय भवन जर्जर है। विद्यालय परिसर में भीषण गन्दगी का साम्राज्य छाया रहता है। इस बारे में जब नदीगांव के खण्ड शिक्षा अधिकारी से बात करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। फिर बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि विद्यालय के शिक्षकों की अनुपस्थिति का मामला उनके संज्ञान में आया है। वे पुष्टि करा रहे है। अगर आरोप सही है कि सम्बन्धित शिक्षकों पर कडी कार्यवाही होगी।







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