ओपीडी के नाम पर मरीजों को बहला देना डाक्टरों के लिए पडेगा महंगा, स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय की बैठक में जिलाधिकारी के कडे तेवर


उरई।
प्राइवेट प्रैक्टिस में जुटे रहने वाले सरकारी डाक्टर अपने अस्पताल की ओपीडी में जमकर घालमेल करते है। इसे संज्ञान में लेकर जिला स्वास्थ्य समिति के शासी निकाय ने उन्हें प्रतिबन्धित करने के लिए नये निर्देश जारी किये है। निर्देश दिये गये है कि मुख्य चिकित्साधिकारी और सम्बन्धित चिकित्साधीक्षक ओपीडी के समय आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और डाक्टरों द्वारा लिखे गये पर्चों को देखेगें। पर्चे पर डाक्टर द्वारा बाहर की दवायें लिखने, उनकी बीमारी का उल्लेख न करने और जांच के लिए मरीज को संदर्भित न किये जाने को गम्भीरता से लिया जायेगा और इस पर सम्बन्धित डाक्टर के खिलाफ कडी कार्यवाही की जायेगी।
मंगलवार को विकास भवन सभागार में स्वास्थ्य समिति की बैठक जिलाधिकारी चांदनी सिंह की अध्यक्षता में हुयी जिसमें स्वास्थ्य और चिकित्सा की सरकारी सेवाओं में हो रही धांधली के कई बिन्दु प्रकाश में लाये गये। बैठक का शुभारम्भ सीएमओ डा0 एनडी शर्मा ने किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबन्धक डा0 प्रेम प्रताप सिंह ने बिन्दुवार विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति का व्यौरा पढा।
जिलाधिकारी के संज्ञान में यह बात थी कि जिला अस्पताल तक में डाक्टर ओपीडी में औपचारिकता भर करते है। मरीज की गहन जांच के लिए जिला अस्पताल से वे किसी पैथोलोजीकल जांच को लिखने से बचते है क्योंकि इससे प्राइवेट पैथोलोजी से मिलने वाले उनके कमीशन में घाटा हो जाता है। इसी तरह डाक्टर अलग से एक पर्चे पर बाहर की वे दवाइयां लिख देते है जिनमें उनको कमीशन मिलता है। नतीजतन जिला अस्पताल फिर एक बार शो पीस बनने पर आ गया है। जिलाधिकारी ने इस स्थिति को बदलने के लिए बैठक में काफी शक्ति दिखायी। कालपी के चिकित्साधीक्षक बिना सूचना के बैठक में नहीं आये उन्हें कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया गया हैै। बताया गया कि हर महीने की 21 तारीख को खुशहाल परिवार दिवस मनाया जायेगा। सभी अस्पतालों से इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा गया।
जननी सुरक्षा योजना में भी गडबडी सामने आयी। खासतौर से रामपुरा, कुठौन्द व शहरी क्षेत्र उरई व कोंच में सबसे अधिक भुगतान लम्बित है। जिलाधिकारी ने इस पर नाराजगी जाहिर की।
बैठक में कई विसगतियां जिलाधिकारी के समक्ष उजागर होने से रह गयी। उदाहरण के तौर पर विशेषज्ञ डाक्टरों की प्राथमिकता के आधार पर जिला अस्पताल में ही तैनाती के निर्देश है लेकिन इसकी अवहेलना कर कई विशेषज्ञ डाक्टर दूरवर्ती अस्पतालों में धकेल दिये गये है। जबकि उनके विषय का कोई अन्य डाक्टर भी जिला अस्पताल में नहीं है। सीएचसी में अधीक्षक बनाने मंे भी धांधली की जानकारी मिली है। इस मामले में प्रमुख उदाहरण माधौगढ सीएचसी का है। माधौगढ के प्रभारी अधीक्षक ओपीडी भी नहीं करते जबकि यहां डाक्टरों की कमी भी है। आयुष डाक्टर से यहां सर्जरी वाले मरीजों को दिखवाया जा रहा है। जो लापरवाही की पराकास्ता है। 

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