उरई।
नगर निकायों के चुनाव की मतगणना का समय अब नजदीक आ गया है। इसी के साथ उम्मीदवारों की दलों की धडकने तेज हो गयी है। मुख्यालय की उरई नगर पालिका के चेयरमैन का ताज किस के सिर सजेगा इस पर अब जमकर चकल्लस हो रही है। यहां यह पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है पर इसके बावजूद रोमांच कम नहीं है। दरअसल यहां दो चर्चित दलित नेताओं ने अपनी प्रतिष्ठा झौंक रखी है जिसके कारण लोग यह जानने के लिए बहुत उत्सुक हैैं कि इनमें से 13 मई को कौन मीर साबित होगा।
उरई नगर पालिका के चेयनमैन पद के लिए उम्मीदवारों की नहीं उन चाणक्यों की चर्चा है जिन्हें यहां की बिसात का असली खिलाडी माना जा रहा है। इनमें एक हैं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विजय चैधरी जिनकी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के काफी पहले से मजबूत तैयारी थी इसलिए अपनी मां गिरजा चैधरी के चुनाव संयोजन में पहले दिन से ही उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुयी। दूसरी ओर भाजपा ने जब रेखा वर्मा की उम्मीदवारी की घोषणा की तो उनके लिए मामला नया होने से चुनौती बडी थी लेकिन उनके मेंटर की भूमिका सम्भाले जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने अपनी मशक्कत से स्थिति को बदल दिया जिससे यह चुनाव बेहद संघर्ष पूर्ण हो गया।
अनुरागी ने अपनी रणनीति से बाबूराम दादा की याद दिला दी जो हर चुनाव में पार्टी की ओर से मोर्चा संभालते थे और बाजी पलट कर दिखा देते थे। उनके न रहने पर भाजपा में स्थानीय स्तर पर सैनापति की कमी महसूस की जा रही थी। लेकिन रेखा वर्मा के चुनाव को संयोजित करने के लिए अनुरागी ने जिस तरह किलेबन्दी की उससे साबित हो गया कि उनमें दादा की जगह भरने का काफी हद तक माददा है। अनुरागी ने रेखा वर्मा के पलडे को वजनदार बनाने के लिए हर बिरादरी की बैठक करायी। दादा भी यही करते थे। बिरादरीबार पैठ बनाकर चुनावी हवा को अपने उम्मीदवार के पक्ष में करने का उनका हुनर कमाल का था। जिसमें छोटी से छोटी बिरादरी को भी वे छूटने नहीं देते थे। घनश्याम अनुरागी ने भी इसी ट्रिक को अजमाकर भाजपा प्रत्याशी के चुनाव को बुलन्दी पर पहुंचा दिया। हालांकि उरई चेयरमैन का ऊंट किस करवट बैठेगा इसके लिए तो 13मई को मतगणना पूरी होने का ही इन्तजार करना होगा।







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