कोंच-उरई।
भारतीय संस्कृति को बचाये व बनाये रखने का काम इप्टा जैसे सांस्कृतिक आंदोलन ही कर रहे है। इप्टा की कार्यशालाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से नयी पीढी सांस्कृतिक मूल्यों के साथ-साथ सामाजिक एवं मानवीय मूल्य भी सीखती है।
यह बात इप्टा की कोंच इकाई द्वारा अखिल भारतीय इप्टा के स्थापना दिवस को जन संस्कृति दिवस के रूप मंे मनाते हुए डा0 मुहम्मद नईम बाॅबी ने कही। उन्होंने अमर चन्द्र महेश्वरी इण्टर काॅलेज में निःशुल्क ग्रीष्मकालीन बाल एवं युवा रंगकर्मी नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन किया। नईम बाॅबी कोंच इप्टा के संस्थापक अध्यक्ष और इप्टा के प्रान्तीय सचिव है।
इस अवसर पर कोंच इप्टा के वर्तमान अध्यक्ष अनिल कुमार वैद एडवोकेट ने कहा कि इप्टा आधुनिक भारत का पहला सांस्कृतिक मंच है जो आंदोलन के रूप में अभी भी अग्रसर है। कई रूपों में, कई संगठनों की शक्ल मंे, देश के विभिन्न हिस्सों में इसे देखा जा सकता है। इप्टा सचिव पारस मणि अग्रवाल ने कहा कि इप्टा ने अपने जन्म से ही साफ कर दिया था कि कला सिर्फ कला के लिए ही नहीं बल्कि जीवन के लिए होनी चाहिए। आधुनिक भारतीय रंग मंच का इतिहास इप्टा का इतिहास है। उपाध्यक्ष ट्रिकंल राठौर ने कहा कि इप्टा के नाटकों ने रंग मंच में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। नृत्य प्रशिक्षिका साक्षी पिपरइया ने कहा कि जातिवाद, क्षेत्रवाद और धर्मवाद का मुकाबला केवल जन संस्कृतिवाद से ही सम्भव है। संगीत प्रशिक्षक विपुल गोस्वामी ने कहा कि जब तक भारतीय समाज में लोकाचार लोक परम्परायें और लोक संस्कृति जिन्दा रहेगी तब तक समाज में हिन्दुस्तानियत जिन्दा रहेगी।
इस अवसर पर अनन्या राठौर, किन्जल यादव, मिनी वर्मा, राधिका वर्मा, करीना वर्मा, महक वर्मा, नव्या सक्सेना, साक्षी सिंह, तमन्ना, अंजलि वर्मा, हिमंाशु साहू, अनन्या वर्मा, माही वर्मा, साजिद मंसूरी, शोएब मंसूरी, सेजल वर्मा, मोहिनी अहिरवार, राधा, गौरी नायक, तेजस्विनी भारद्वाज, दिव्या वर्मा, वैश्नवी, अंशिका, मुस्कान, पूनम, विकास गोस्वामी, कोमल अहिरवार, युनूस, दानिश आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महा सचिव सहाना खान और आभार अमन अग्रवाल ने जताया।







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