उरई।
घटिया सडक निर्माण को लेकर जिलाधिकारी चांदनी सिंह ने जांच के बाद गम्भीर रूख अपनाते हुए ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग के 02 वरिष्ठ अभियन्ताओं का वेतन अग्रिम आदेशों तक के लिए रोक दिया है। इन अभियन्ताओं में अधिशाषी अभियन्ता भी शामिल हैं।
मामला कदौरा विकास खण्ड का है। ग्राम पंचायत कानाखेडा से लेकर ग्राम पंचायत चंदरसी तक ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग के माध्यम से रोड निर्माण का काम चल रहा था। आजादी के बाद पहली बार यहां पक्का रोड त्वरित विकास योजना के अन्तर्गत बनने जा रहा है। जिससे ग्रामीण भावनात्मक रूप से रोड को लेकर बहुत उत्साहित होने के साथ-साथ संवेदनशील भी थे। गोया उनके घर में कोई काम हो रहा हो इस तरह उन्होंने इस रोड से अपने को जोड रखा था।
आरईडी के अभियन्ता लोगों की भावुकता को भाप नहीं पाये और हमेशा के ढर्रे की तरह रोड के बजट का तिया पांचा करने लगे। अभी पहली लेयर का काम हुआ है और दूसरी लेयर डालकर डामरी करण होने वाला था तभी ग्रामीणों ने इसमें खराब गिट्टी व अन्य मटेरियल का इस्तेमाल देखा तो तत्काल अभियन्ताओं के सामने आपत्ति व्यक्त की। लेकिन उनकी सेहत पर जब कोई असर नहीं पडा तो वे सीधे डीएम के दरबार में पहुंच गये। उन्होंने ग्रामीणों की भावनाओं को समझा और उनकी शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीडीओ के नेतृत्व मंे जांच समिति गठित करके स्थलीय अवलोकन के लिए उसे रवाना कर दिया। बताते हैं कि डीडीओ सुभाष चन्द्र त्रिपाठी की टीम जब गांव पहुंची तो ग्रामीणों की भीड ने उसे घेर लिया। दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है की तर्ज पर ग्रामीण जांच समिति को लेकर भी संदेह कर बैठे थे कि कहीं ये अधिकारी भी इंजीनियरों से मिलकर जांच में लीपा पोती न कर दें।
वे आक्रोश और विलाप की मिली जुली मुद्रा में डीडीओ श्री त्रिपाठी से कहने लगे कि उनके गांवों में कोई उनकी लडकी के लिए बरात लेकर आने को तैयार नहीं होता था। सडक न होने से रास्ता दुरूह था जिससे बेटी के रिश्ते की बात वर पक्ष द्वारा गांव का हाल देखते ही तोड दी जाती थी। अब उनका नसीब जागा है तो इंजीनियर ऐसी रोड बनाये दे रहे है जो कुछ ही दिनों की मेहमान रह पायेगी और हम फिर पहले जैसी स्थिति में हो जायेगे। इसलिए आप लोग सही सही जांच करें। यह हमारे लिए जीवन मरण का सवाल है। डीडीओ श्री त्रिपाठी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे डीएम साहिबा को बिना लाग लपेट के जो सही होगा वही रिपोर्ट देंगे। आप कतई सशंकित न हों। डीडीओ कमेटी ने सडक का अवलोकन किया जो पहली नजर में ही अधोमानक दिख रही थी। पुलिया का निर्माण भी मानक विहीन हुआ था। डीडीओ कमेटी ने इसे लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट डीएम को सुपुर्द कर दी। जिसस पर आज डीएम ने आरईडी के अधिशाषी अभियन्ता विनोद कुमार और सहायक अभियन्ता शैलेन्द्र सिंह को रोड बनाने में गडबडी के लिए सरसरी तौर पर जिम्मेदार मानते हुए उनके वेतन के निकासी पर अगले आदेशों तक के लिए रोक लगा दी जिससे हडकम्प मच गया है। ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि रोड सही तरीके से बन पायेगी। लेकिन उनका कहना है कि अभियन्ताओं को और अधिक दण्ड दिया जाना चाहिए ताकि वे जनहित के निर्माण कार्यो में घपले बाजी से बाज आ सके।

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