कोंच-उरई |  वर्ल्ड हेल्थ ओर्गनाइजेशन के अनुसार तंबाकू सेवन से हर साल करीब 8 मिलियन मौतें होती हैं |  हालांकि तंबाकू सेवन करने वाले प्रमुख रूप से धूम्रपान करते हैं, लेकिन इधर कुछ समय से स्मोकलैस यानी धुंआरहित तंबाकू स्मोकस् टोबोको सेवन में भी काफी बढ़ोतरी हुई है | इसका मुख्य कारण यह गलत प्रचार है कि यह धूम्रपान के मुकाबले यह कम नुकसानदायक होता है जबकि वास्तविक ता यह है कि स्मोकलैस तंबाकू भी आप की प्रजनन क्षमता, प्रोडक्टिविटी, हार्ट और लंग हेल्थ को प्रभावित करता है।

किशोरों में निकोटिन का सेवन उनके मस्तिष्क द्वारा संचालित कई गतिविधियों जैसे एकाग्रता, लर्निंग, मूड और इम्पल्स कंट्रोल आदि पर बुरा असर डालता है | जिसकी वजह से आगे चलकर वे अन्य नशीले पदार्थों की लत में पड़ सकते हैं।

महिलाओं में तंबाकू का प्रयोग उनके शरीर की अनेक महत्वपूर्ण क्रियाओं पर बुरा असर डाल सकता है, जिसमें डिंबग्रंथि (ओवरी) का फंक्शन प्रभावित हो सकता है, उसकी मॉर्फोलॉजी पर असर पड़ सकता है, डिंब बनाने वाली कोशिकाओं की क्वालिटी बिगड़ सकती है और हार्मोनल रैग्युलेशन पर भी असर पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान समय से पहले प्रसव (अर्ली डिलीवरी) या मृतजन्म (स्टिलबर्थ) जैसी आशंकाएं बढ़ सकती हैं। यह जन्म से पहले भ्रूण के मस्तिष्क विकास को प्रभावित करता है और शिशु के स्वास्थ्य पर भी दीर्घकालिक रूप से असर डालता है|  तंबाकू उत्पादों को किसी भी रूप में बढ़ावा न देने के तमाम प्रयासों के बावजूद लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों की जानकारी बहुत कम है। भारत में ओरल और लंग कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे काफी हद तक बीड़ी और तंबाकू जिम्मेदार है। तंबाकू और धूम्रपान से हृदय रोगों और स्ट्रोक से मौत का खतरा बढ़ सकता है|  डॉक्टर सरमील कुमार डायटिशियन के अनुसार धूम्रपान छोड़ना फेफड़ों की बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है लेकिन अगर आप फेफड़ों के लिए हेल्दी फूड्स का सेवन करते हैं तो आप अपने नुकसान को कुछ हद तक कम करने में सफल हो सकते हैं। डॉक्टर सरमील कुमार डायटिशियन ने कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताया है जो हेल्दी फेफड़े और फेफड़े की फंक्शनिंग को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं | जब आप किसी भी प्रकार का धूम्रपान करना छोड़ते हैं तो शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं लेकिन शरीर को सही तरीके से अगर डिटॉक्स कर लिया जाए तो इंसान की धूम्रपान छोड़ने की इच्छाशक्ति प्रबल होती है।डायटिशियन के अनुसार टमाटर और सेब से धुएं से डैमेज लंग्स को रिकवर करने में कुछ हद तक मदद मिलती है । अध्ययन में पाया गया कि जो लोग एक दिन में औसतन दो टमाटर या सेब खाते हैं तो उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता में काफी सुधार पाया गया है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन इसे मजबूत एंटीऑक्सी डेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-कैंसर गुण देता है जो फेफड़ों को निकोटीन से होने वाले नुकसान से बचाता है। अदरक में पोटेशियम, मैग्नीशियम, बीटा कैरोटीन और जिं

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