सामी में चल रहे यज्ञ में मंचित हो रही रामलीला , धनुष भंग लीला ने ग्रामीणों को खूब रिझाया

कोंच-उरई |  तहसील क्षेत्र के ग्राम सामी में यज्ञ चल रहा है जिसमें साथ –साथ  राम लीला का मंचन भी किया जा रहा है | बीते दिन इसमें  धनुष भंग लीला आयोजित की गई |  लीला में मंचित किया गया कि  सीता स्वयवर में  बड़े बड़े राजा महाराजा जनकपुरी  आये और शिव जी के धनुष को कोई भी राजा उठाना तो दूर हिला तक नही पाया|  वही बाद  में दशरथ नन्दन राम ऋषि के साथ पधारे थे ने  शिव जी के धनुष को एक पल मे तोड़ दिया | तब  देवी देवताओं ने पुष्प वर्षा कर उनका  स्वागत किया और फिर जनक नन्दिनी सीता मे राम के गले मे माला डाल दी |  इसके बाद दूसरे दिन रंगमंच पर राम वनवास लीला का आयोजन किया गया|  इस लीला में राजा दशरथ अपने मंत्री जनों के सामने  राम को अयोध्या का राजा बनाये जाने का प्रस्ताव रखते हैं और राम को राजा बनाने की तेयारी होने लगती है | जब राम को राजा बनाये जाने की जानकारी देवी देवताओं को होती है तो उन्हे अच्छा नही लगता   और वह इस पर रोष प्रकट कर माँ सरस्वती जी से मांग करते है कियह प्रस्ताव मंजूर नही होने दें | इस पर सरस्वती जी राजा दशरथ की प्रिय महारानी केकेई की प्रिय दासी मंथरा की बुद्धि फेर देती है और जब मंथरा को राम के राज्याभिषेक की खबर लगती है तो उसे यह सब ठीक नही लगता है |  वह महारानी केकेई के महल को जाती है | केकई अपने महल मे अपनी सखियों के साथ आनंद ले रहीं होती है उसी समय मंथरा आ जाती है और महारानी को अपनी कुटिल नीति से अपनी ओर कर राम को वनवास और भरत को राजा बनाने के लिए राजा दशरथ से दो वरदान मांगने हेतु उकसाती है और इसके चलते कैकयी राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगकर राम को चौदह वर्ष का बनवास और भरत को राजा बनाने के लिए राजी कर लेती |  अंत मे राम को चौदह वर्ष के  वनवास के लिए भेज दिया जाता है |  राम लीला में कलाकारों के अभिनय ने   गाँव वालों को खूब रिझाया |  इस अवसर गाँव के प्रधान आनंद पचौरी , हरिओम बुधौलिया , आकाश सहित कई लोग मौजूद रहे |

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