उरई।
चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप राजकीय मेडिकल काॅलेज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी चांदनी सिंह के साथ निरीक्षण में उन्होंने मेडिकल काॅलेज के प्रधानाचार्य डां आरके मौर्या से मुख्य रूप से शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशिक्षण के स्तर के बारे में चर्चा की।
उन्होंने मेडिकल काॅलेज की सभी विंगो और सेन्ट्रल किचिन आदि को परखा। पीडिया वार्ड में निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों के परिजनों से भी बात की। परिजनों ने व्यवस्था को संतोषप्रद बताया। पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों के संचालन के बारे में प्रधानाचार्य डां रीना कुमारी से विस्तृत चर्चा की।
उन्हे बताया गया कि बहुत कम समय में मेडिकल काॅलेज ने बहुत तेज गति से कार्य करते हुये नये आयाम स्थापित किये हैं। मरीजों को अन्य जनपदों में न जाकर आकस्मिक सेवाओं का समुचित लाभ यहां प्राप्त हुआ है। इस दौरान उन्होंने डायलिसिस यूनिट और माइक्रोबायलाॅजी के अन्तर्गत कल्चर जांचों इत्यादि का फीता काटकर शुभारंभ किया। साथ ही केन्द्रीय पुस्तकालय में समस्त चिकित्सा शिक्षकों एवं चिकित्सकों के साथ बैठकर उन्हें शिक्षण प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान उप प्रधानाचार्य डां आरएन कुशवाहा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डां जीएस चैधरी, वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों में डां शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डां सुनित सचान, डां अरूण अहिरवार, डां रेनू सिंह, डां छवि जायसवाल, डां विशाल अग्रवाल सहित समस्त चिकित्सा शिक्षक और चिकित्सीय एवं नर्सिंग टीम उपस्थित रही। इस दौरान कई मरीज डाॅक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रेक्टिस करने की वजह से आउटडोर में मरीजों को देखने में रूचि न लेने, पैथलाॅजी बंद रखकर मरीजों को बाहर से जांच के लिये बाध्य किये जाने और मामूली मर्ज के रोगियों को भी रेफर कर दिये जाने जैसी शिकायतों से प्रमुख सचिव को अवगत कराना चाहते थे पर इसका कोई मौका नहीं दिया गया।







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