लखनऊ।
प्रदेश कैडर के बहुचर्चित आईपीएस मणिलाल पाटीदार को राज्य सरकार की सिफारिश पर केन्द्र ने बर्खास्त कर दिया है। गौरतलब है कि अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिये प्रदेश सरकार को अधिकृत नहीं माना जाता। केन्द्र सरकार ही अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई का कदम उठा सकती है।
मणिलाल पाटीदार का नाम भी आईपीएस अधिकारियों की सिविल सूची से हटा दिया गया है जिसके कारण उनके नाम के साथ आईपीएस नहीं जोड़ा जा सकेगा। यह कार्रवाई महोबा जिले के क्रैशर कारोबारी इन्द्रकांत त्रिपाठी की मौत के मामले में उठाया गया है। पाटीदार इस मामले में जेल में बंद हैं और इन्द्रकांत त्रिपाठी की मौत के लिये उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। पाटीदार उस समय महोबा के एसपी थे। क्रैशर कारोबारी इन्द्रकांत त्रिपाठी ने उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये थे। इस संबंध में एक वीडियो को सार्वजनिक किये जाने के बाद इन्द्रकांत त्रिपाठी की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गयी थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आईपीएस पाटीदार और तीन अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था।
इस मामले में जांच के लिये विशेष टीम गठित की गयी थी। जिसमे उन्हे और अन्य पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया। बाद में जिसे लेकर तत्कालीन थानाध्यक्ष देवेन्द्र शुक्ला समेत चार सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया गया था। एक्शन शुरू होते ही मणिलाल पाटीदार फरार हो गये थे जिनकी गिरफ्तारी के लिये उन पर 1 लाख रूपये का इनाम घोषित किया गया था। 2 साल तक फरार रहने के बाद पाटीदार ने 15 अक्टूबर 2022 को लखनऊ कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया तब से वह जेल मे हैं। इस बीच राज्य सरकार ने उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश केन्द्र को भेजी जिसे आज मंजूर कर लिया गया।
राजस्थान के निवासी है पाटीदार
राजस्थान के डूंगरपुर के निवासी मणिलाल ने 2013 में संघ लोग सेवा आयोग की परीक्षा पास की थी। इलैक्ट्राॅनिक टेली कम्युनिकेशन से बीटेक करके वे इसकी तैयारी में जुट गये थे। कहा जाता है कि रातो रात अमीर बनने का सपना उन्हें ऐसे लालच में ढकेलने का कारण बन गया जिसमें इन्द्रकांत त्रिपाठी की जान चली गयी और उनकी नौकरी।







Leave a comment