पचनदा संगम पर सजा गंगा जमुनी साहित्यिक कुंभ, रचनाकारों ने काव्य धारा के रस से किया सराबोर


उरई।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की हिन्दी उर्दू जिला शाखा द्वारा ऐतिहासिक पांच नदियों की पवित्र संगमस्थली पचनदा धाम पर शानदार कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें दो दर्जन साहित्यशिल्पियों ने अपनी रचनाओं का पाठ करके समां बांध दिया। इंसानियत और भाईचारे का संदेश देने के लिये समर्पित इस आयोजन में सुधी श्रोता खूब झूमें।
चंबल के बीहड़ों के क्रांतिकारी बाशिंदों की विरासत को सहेजने के लिये देशभर में सुर्खियां बटोर चुके चंबल परिवार के कमांडर शाह आलम राना ने साहित्य सभा के संयोजक शफीकुर्रहमान कशफी, हिंदी सभा के अध्यक्ष डां अनुज भदौरिया, उर्दू सभा के अध्यक्ष फरीद अली बसर को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
पचनदा धाम के महंत श्री सुमेरमन महाराज की अध्यक्षता में अनुज भदौरिया के सरस्वती वंदना पाठ से कार्यक्रम का आगाज हुआ। फराज खान ने पढ़ा शरीफ आदमी से जमाना है लेकिन शरीफ आदमी का जमाना नहीं है। दिव्यांशू दिव्य ने सुनाया रोना धोना खुद को खोना बेकार की बातें हैं, नहीं अगर कोई साथ तो भगवान होता ही है। कवियित्री इंदु विवेक ने पढ़ा इंसान नहीं रहता जीवित लेखन जिंदा रह जाता है, इंसान स्वयं न कह पाये लेखन वो वो कह जाता है। जावेद कसीम ने पढ़ा जेब की बुश्शर्टों से जो बाहर हुयी भूंख तकती रही रोटिया देर तक। शिखा गर्ग ने पढ़ा पांव रख दो कठौते में, धोलू प्रभू। नईम जिया ने सुनाया दिलों में इतनी तो गुंजाइश रहे बाकी कि फासला अगर हो तो फासला न लगे। संचालन कर रहे अभिषेक सरल ने पढ़ा हाथ आया फिसल गया, एक ख्वाब नींद को ही निगल गया। जिले की मशहूर कवियित्री प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने पढ़ा हृदय उदगार कविता है, प्रखर उदगार कविता है, हृदय की ताल पर झूमे वो हर झंकार कविता है। महासचिव राघवेन्द्र कनकने ने पढ़ा बारिश के मौसम में छत पर छप छप करना भूल गये, जाने कैसे बचपन है ये घर से निकलना भूल गये।
सभा के अध्यक्ष डां अनुज भदौरिया ने पढ़ा बहुत दिनों के बाद मिली वो शीत लिखेंगे, कहां हार के दिल जीता था प्रीत लिखेंगे। उर्दू सभा अध्यक्ष फरीद अली बशर ने पढ़ा जान देकर खरीद पाये हम लोग, लोग कहते है मौत सस्ती है। शफीकुर्रहमान कश्फी ने पढ़ा इस दौर के काबिल से इक बात पूंछनी है, बाकी भी कुछ बची है औकात पूंछनी है। बृह्मप्रकाश ने पढ़ा बहुत सी क्रांति बस एक क्रांति और लाना है सहभाव से इंसान में चरित्र क्रांति को जगाना है। अतीक खान ने पढ़ा सोचकर मुझको बताना यार क्या आसान है। इंतखाब दानिश ने पढ़ा दिखाते दिखाते हर शख्स की सच्चाई दानिश, इक न इक दिन आखिर आइना टूट जाता है वहीं बुंदेली कवि जगतपाल सिंह जगम्मनपुर को संयोजक कश्फी ने माधौगढ़ तहसील साहित्य सभा का प्रभारी नियुक्त करने की घोषणा की।
इस दौरान विजय द्विवेदी, शाह आलम, श्रीमती कल्पना कनकने, हरेन्द्र सिंह चंदेल, योगेन्द्र सिंह, भारत सिंह सहित तमाम लोगों की मौजूदगी रही। अंत में अध्यक्ष पद से महंत जी ने सब को आशीर्वाद दिया और ऐसे स्थान पर पहली बार अनूठा कार्यक्रम कराने के लिये आयोजकों को बधाई दी। आगे भी और भव्यता के साथ यहां ऐसे आयोजन कराने का जोश भरा।

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