
उरई।
लोक कला की संस्था कलाभूमि के कलाकारों ने स्थानीय मंडपम सभागार ने बीती रात कथक, अचरी गायन और वादन की त्रिवेणी में सुधी दर्शकों को रस के इतने गोते लगवाये कि वे तृप्त होकर वाह वाह कर उठे। कार्यक्रमों को निर्देशन कलाभूमि की अध्यक्षता सुमिति श्रीवास्तव और संचालन वागीशा कुमुद ने किया।

गणेश वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया जिसमें बाल कलाकारों अदिति सिंह, आरना, स्वरा मंडलोइ ने विघ्नहर्ता गणपति का स्तुति वाचन किया। इसके बाद बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गायन बाल कलाकार आशवी सिंह ने किया। इसके बाद अप्सरा तिवारी और अनवी ने महाकवि तुलसीदास कृत शिव रूद्राष्टक स्त्रोत पर नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य संरचना पंडित राजेन्द्र गंगानी की रही तथा गायन समीउल्लाह ने किया। कलाकारों ने नृत्य में अपनी भाव भंगिमाओं से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध सा कर दिया। इसके बाद कत्थक नृत्य कलाकार कनन्यका सिंह ने रामभजन पर सुंदर नृत्य दिखाया जिसमें तीन ताल, तिहाई तोड़े परन पल्टी का प्रयोग कर उन्होंने अपनी प्रस्तुति से लोगों को भाव विभोर कर दिया। इस कत्थक नृत्य पर गायन समीउल्लाह का रहा और तबले पर संगत योगेश ने दी। इसके बाद ग्राम गुढ़ा सिमिरिया के लोक गायकों क्रमशः राजा सिंह भोले, बालादीन सिंह निषाद, बूटी सिंह निषाद, रामखिलाड़ी सिंह निषाद, जयप्रकाश, कल्लू सिंह और अतिथि गायन के लिये पधारे प्रसिद्ध गायक, संगीतकार राजेश निरंजन ने ईसुरी की फागें सुनाई। फिर अचरी सुनाकर ऐसा माहौल रच दिया जैसे नवरात्रि का जागरण चल रहा हो।

इसके बाद बाल कलाकार आर्य अग्रवाल ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की चर्चा के साथ भजन प्रस्तुत किया-छोटी छोटी गइयां छोटे छोटे ग्वाल, छोटो से मेरे मदन गोपाल सुनाईं। इसी क्रम में अन्य गायन और नृत्य प्रस्तुतियों ने जादू रच डाला। मुहम्मदाबाद के कलाकारों शिवकुमार मास्टर, जगदीश मास्टर, कृष्णदत्त तिवारी, लालाराम अहिरवार, लल्लूराम अहिरवार, ठाकुर प्रसाद पांचाल, हरिश्चन्द्र राजपूत, दिलीप कुमार ने फाग गायन से सबका मन मोह लिया।
इसके पूर्व सरस्वती की मूर्ति का पूजन और दीप प्रज्वलन हुआ। अतिथियों को अंगवस्त्र पहनाकर स्मृति चिह्न भेंट किये गये। इस अवसर पर लोक साहित्य के लेखक अयोध्या प्रसाद कुंभ, डां हरीमोहन पुरवार, डां चरक, प्रोफेसर अलका पुरवार, रानी गुप्ता, सौरभ महेश्वरी, प्रसन्न वैंकट, रश्मि गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।







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