चितेरी लोक कला पर कार्यशाला का आयोजन, लोक कला के निदेशक ने किया शुभारंभ


उरई।
लोक कला, जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में चितेरी लोक कला कार्यशाला ‘सृजन’ का मनमोहक आयोजन टाउन हाॅल सभागार में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन लोक, जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने किया। इसमें जिले के 25 कलाकारों ने भाग लिया।
इस अवसर पर उन्होंने चितेरी प्रशिक्षुओं को चितेरी लोक कला को बढ़ाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि चितेरी बेमिसाल कला है जो कि मधुवनी या बर्ली कला की तरह अनूठी है। चितेरी बुंदेली कलाम शैली का एक हिस्सा है इसलिये क्षेत्र के युवाओं को चितेरी कला का प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ साथ इसके प्रचार प्रसार का भी कार्य बहुतायत के तौर पर करना चाहिये।
कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित समाजसेवी रोहित त्रिपाठी ने इस कार्यक्रम के संयोजक रोहित विनायक की प्रशंसा करते हुये कहा कि वे हमारी पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिये ऑक्सीजन देने का कार्य कर रहे हैं। रोहित त्रिपाठी ने कहा कि बुंदेलखण्ड संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां आज भी चितेरी कला प्रमुख रश्मों का एक हिस्सा है जिससे घर की दीवारें सजाई जाती रहीं हैं। उन्हांेने युवाओं का आवाहन करते हुये कहा कि बुंदेली चितेरी कला को कपड़ों, अंग वस्त्रों, पेंटिंग के माध्यम से जीवंत उकेरकर सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी इसका प्रचार प्रसार करें। संयोजक रोहित विनायक ने बताया कि संस्कृति विभाग के अंतर्गत लोक, जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान द्वारा बुंदेलखण्ड की पारंपरिक चितेरी कला के संवर्धन के लिये इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला में तैयार  होने वाली कलाकृतियों को लखनऊ में अगस्त माह में लगने वाली प्रदर्शनी में रखा जायेगा।
कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में विशेष तौर पर प्रदीप वर्मा, अभय पाण्डेय, निखत, खुशनाज, श्वेता वर्मा, साक्षी शुक्ला, इशान कश्यप, दीपांजले राजपूत, श्रद्धा राजपूत, किशन प्रजापति, पंकज तिवारी, आकांक्षा निरंजन आदि उपस्थित रहे।

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