रासलीला असभ्यता व फूहडता का नंगा नाच नहीं बल्कि आत्मा से परमात्मा के मिलन का अद्भुत संयोग

 

जगम्मनपुर -उरई। रासलीला उन्मादी युवाओं के द्वारा किया जाने वाला असभ्यता से युक्त अपवित्र नृत्य नहीं बल्कि आत्मा से परमात्मा के मिलन की ईश्वरीय  पवित्र क्रिया है।

 उक्त उद्गार पंचनद धाम कंजौसा  पर श्रीमद्भागवत के सातवें समापन दिवस पर आचार्य पंडित अखिलेश पाठक ने कृष्ण चरित्र लीला का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। आचार्य श्री पाठक ने व्यासपीठ से हजारों की संख्या में उपस्थित श्रोताओं एवं श्रीमद् भागवत कथा के पारीक्षत श्रीपाल राठौर पूर्व प्रधान हुसेपुरा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए , उन्होने कहा कि कुछ अपवित्र विचारधारा के तथा अनपढ़ लोग भगवान की पवित्र लीलाओं की नकल करके असभ्यता से युक्त फूहड़ क्रियाएं करके रासलीला का नाम देकर समाज में माहौल खराब करने का पाप कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन की पवित्र भूमि पर रासलीला करके आत्मा से परमात्मा के मिलन का पवित्र एवं अलौकिक दिव्य संयोग उपस्थित किया था । उन्होने कहा कि प्रत्येक परिवार के अभिभावक अपनी संतानों में भारतीय संस्कार दें ताकि हमारी संस्कृति के माध्यम से भारतीय समाज सहित संपूर्ण विश्व में भारतीय महापुरुषों के आदर्शों का पवित्र भाव स्थापित हो सके । इस अवसर पर सरस कथा वाचिका पंडित श्यामा किशोरी ने भगवान श्री राम की लीलाओं का अद्भुत वर्णन किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण ज्ञान यज्ञ के आयोजक श्रीपाल राठौर पूर्व प्रधान हुसेपुरा जागीर ने उपस्थित श्रोताओं व आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि श्री बाबासाहब मंदिर पंचनद कंजौसा पर सोमवार को संत भोजन एवं भंडारे का आयोजन होगा।

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