उरई-, जालौन जिले के कालपी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम संदी में एक युवक की लाठी, डंडों और हॉकी से मारपीट कर हत्या करने के मामले में विशेष एससी-एसटी एक्ट कोर्ट ने दो सगे भाइयों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न अदा करने पर प्रत्येक को दो-दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता की अदालत ने शुक्रवार को सुनाया।

घटना का विवरण

शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह राजपूत ने बताया कि कालपी कोतवाली के कस्बा राम चबूतरा निवासी साकेश कुमार ने आटा थाना पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वह ग्राम संदी में सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात थे। उनके साथ गांव के ही संतोष कुमार की भी सफाई कर्मचारी के रूप में नियुक्ति थी। 13 जनवरी 2023 को साकेश की तबीयत खराब होने के कारण उनके पुत्र हिमांशु कुमार उनकी जगह सफाई कार्य के लिए संतोष कुमार के बुलावे पर मोटरसाइकिल से ग्राम संदी गए थे। संतोष ने हिमांशु को ग्राम संदी के बाहर स्थित सचिवालय में बुलाया, जहां उस दिन सचिवालय बंद था। हिमांशु के वहां पहुंचने के कुछ देर बाद संतोष तीन अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ सचिवालय आया। इसके बाद संतोष और उसके साथ आए लोगों ने हिमांशु पर लाठी, डंडों और हॉकी से हमला कर दिया, जिससे हिमांशु की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

पुलिस जांच और गिरफ्तारी

साकेश की तहरीर के आधार पर आटा थाना पुलिस ने संतोष कुमार और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के दौरान संतोष के छोटे भाई दीपक का नाम भी प्रकाश में लाया। दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने गहन जांच के बाद दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।

कोर्ट में सुनवाई और फैसला

मामले की सुनवाई विशेष एससी-एसटी एक्ट कोर्ट में हुई। ट्रायल के दौरान वादी साकेश कुमार, गवाहों और डॉक्टर के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने संतोष कुमार और उनके छोटे भाई दीपक को हत्या का दोषी पाया। शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में दोनों को दो-दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।जालौन पुलिस ने अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा, “जालौन पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना, अचूक साक्ष्य संकलन और डीजीसी क्रिमिनल व उनकी टीम की प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप हत्या के अभियोग में दो अभियुक्तों को माननीय न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास और 50,000-50,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। फैसले ने पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय का एहसास दिलाया है। स्थानीय लोगों ने कोर्ट के इस निर्णय की सराहना की और पुलिस की त्वरित कार्रवाई और साक्ष्य संकलन की प्रशंसा की। शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह राजपूत ने कहा कि यह फैसला समाज में अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कोई भी अपराधी कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता। यह मामला जालौन जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। सचिवालय जैसे सार्वजनिक स्थान पर दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। कोर्ट के इस फैसले से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिला, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ कि पुलिस और न्यायिक व्यवस्था मिलकर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कटिबद्ध हैं। पुलिस अब भी इस मामले में अन्य संभावित पहलुओं की जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य दोषी बच न पाए।

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