
-राकेश कुमार उपाध्याय लखनऊ
उत्तर प्रदेश के गैरिक वस्त्रधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके प्रोफाइल के मददेनजर शुरूआत में एक पुरातनपंथी, दकियानूस मुख्यमंत्री के रूप में आंका जा रहा था जिसके सरोकार मंदिर, धार्मिक अनुष्ठानों और त्यौहारों की भव्यता को बढ़ाने तक सीमित हों। लेकिन राज्य की औद्योगिक समृद्धि के लिए उनके संकल्प और उन्हें धरातल पर उतारने की सटीक कार्य योजनाओं से वे यह साबित करने में सफल रहे हैं कि आधुनिक शासन की जरूरतों से भी उनका पूरी तरह परिचय है बल्कि इस संदर्भ में कई मामलों में वे अभी तक के सभी मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की वन ट्रिलियन की अर्थ व्यवस्था बनाने का लक्ष्य जिस समय घोषित किया था उस समय लगा था कि इस मामले में उनके प्रयास खाली-पीली डींगे साबित होकर रह जायेगें। पर उनके द्वारा प्रस्तुत इसका खाका इतना वास्तविक, इतना व्यवहारिक और इतना योजनाबद्ध है कि सामान्य लोगों को भी संदेह नही रह गया कि मुख्यमंत्री के प्रयास गन्तव्य तक पहुंचने में कहीं अटक सकते हैं।

योगी की आधुनिक दृष्टि
योगी आदित्यनाथ ने सिंहासन संभालने के बाद पहले दिन से ही उत्तर प्रदेश के प्राचीन समय से विश्व भर में समादृत रहे सांस्कृतिक गौरव को पुनर्प्रतिष्ठित करने के साथ-साथ विकास के आधुनिक आयामों में उसको देश का सबसे अग्रणी राज्य बनाने का निश्चय साधा था। उन्हें विरासत में ऐसा उत्तर प्रदेश मिला था जिसकी गिनती बीमारू राज्यों में होती थी। जहां विधि अव्यवस्था का खतरनाक आलम था। जहां उद्योग लगाने के लिए आने वाले उद्यमियों को नेताओं से लेकर माफियाओं तक की चौथ वसूली झेलनी पड़ती थी। ऐसे राज्य को औद्योगिक रूप से अग्रणी बनाने का संकल्प बंजर में हरियाली उगाने जैसा असंभव सपना था। ताजा आंकड़े बताते हैं कि नीति आयोग के इंडैक्स में ऊंची छलांग लगाकर यूपी 29वें स्थान से 18वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछड़ा प्रदेश गत वित्तीय वर्ष में 67 का स्कोर हासिल करके फ्रंट रनर श्रेणी में शामिल हो गया है। वर्तमान नेतृत्व के जारी रहने पर आने वाले कुछ वर्षों में ही उत्तर प्रदेश शत-प्रतिशत स्कोर को छू ले तो आश्चर्य न होगा।

अपनी शर्तों पर उद्योगों का स्वागत
बेहतर कानून व्यवस्था के साथ-साथ साफ-सुथरा प्रशासन योगी सरकार की खास उपलब्धियां हैं। इसके चलते कारोबार करने वालों को अफसरशाही के भयादोहन से भी बहुत हद तक सुरक्षा दिला दी गई है। निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश जैसे अफसरों की कारगुजारियां सामने आ गईं तो फिर उन्हें कोई बचाने वाला नही सूझ सकता। इस साख ने ईमानदार उद्यमियों में उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार पर भरोसा बुलंदी पर पहुंचा दिया है। लेकिन दूसरी ओर यह भी है कि जिन्हें अत्यधिक मुनाफाखोरी की लत के कारण दंद-फंद की छूट चाहिए वे उद्योगपति उत्तर प्रदेश आने से डरते हैं। मिर्जापुर के वन क्षेत्र में अडानी के थर्मल पॉवर प्लांट का काम रुकवाकर योगी ने यह सिद्ध कर दिया है कि आप कितने भी बड़े बिग गन हों लेकिन आपके लिए किसी नियम और प्रक्रिया को बाईपास किया जाना संभव नही है। उद्यमियों को जायज प्रोत्साहन तो बढ़ाये जा रहे हैं लेकिन सभी कुछ नियमों और जनहित के दायरे तक मानना चाहिए। कई कारपोरेट जिन्हें बाजीगर माना जाता है योगी सरकार की पारदर्शी नीति से खिन्न हैं। पर योगी सरकार को इसकी परवाह नही है। उसका उसूल है कि आंकड़े जुटाने के लिए स्याह-सफेद सबको चलने देने वाला समझौतावादी निजाम यह नही है। यहां केवल सफेद चाहिए, स्याह कुछ नही।

औद्योगिक मेला स्थल के रूप में दुनियां के नक्शे पर अंकित हुआ लखनऊ
योगी सरकार ने प्रतिवर्ष देश-विदेश के बड़े कारपोरेट दिग्गजों का लखनऊ में मेला जुटाने का कामयाब सिलसिला चलाया जिसमें उनकी दूर दृष्टि और आर्थिक मामलों में परिपक्व समझ झलकती है। औद्योगिक मेलों का सरसरी जायजा यहां लेना मुनासिब होगा। पहली यूपी इन्वेस्टर समिति 21-22 फरवरी 2018 को आयोजित की गई जिसका उदघाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं आये थे। इसमें 4.28 लाख करोड़ निवेश के 1045 एमओयू हस्ताक्षरित किये गये थे। मुख्य रूप से सड़क, बिजली आदि बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, आईटी और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश के प्रस्ताव इनमें शामिल थे। इसी क्रम में 29 जुलाई 2018 को ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित हुई जिसमें 60 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। 10 से 12 फरवरी 2023 में हुये ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिटि में 19700 से अधिक निवेश प्रस्तावों के तहत 33.50 लाख करोड़ के एमओयू हस्ताक्षरित हुए। रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस समिट में आकर 75 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। दूसरी इन्वेस्टर समिट में रक्षा, एयरोस्पेस, पर्यटन और नवीकरणी ऊर्जा जैसे 27 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों के तहत निवेश आकर्षित किये गये। 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 10 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मूर्त रूप देने के लिए चुना गया। 2024 तक समिट्स और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने निवेश के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की। इन प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित कर लिया।
अगली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का दिग्विजयी स्वप्न
अगली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी नवंबर 2025 या जनवरी-फरवरी 2026 में कराई जानी प्रस्तावित है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 20387 निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप दे दिया है। इसके अतिरिक्त इस सेरेमनी के शुरू होने के पहले राज्य सरकार 5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को लागू करने की तैयारी कर रही है। जिसके 10 लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। आगामी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के पहले चीन, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, यूएई, कतर और कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय रोड शो आयोजित किये जायेगें जो कि विदेशी उद्योग मुगलों को आमंत्रित करने के लिए होगें। स्पष्ट है कि इन आयोजनों ने उत्तर प्रदेश में बड़ी औद्योगिक क्रांति का बीजारोपण कर दिया है जिसके वट वृक्ष का रूप लेने पर उत्तर प्रदेश दुनियां का सबसे बड़ा औद्योगिक हब नजर आने लगेगा।
औद्योगिक कानूनी सुधार वाला पहला राज्य
औद्योगिकीकरण की राह को ज्यादा से ज्यादा आसान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिये जा रहे सतत फैसलों की कड़ी में ताजा फैसला सुगम्य व्यापार विधेयक लाने की मुख्यमंत्री की घोषणा है। इसके तहत उद्योग व्यापार से जुडे़ 13 राज्य कानूनों में आपराधिक प्रावधान लगभग समाप्त कर दिये जायेगें। इसके अंतर्गत विचारणीय कानूनों में आबकारी अधिनियम, शीरा अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, गन्ना अधिनियम, भूगर्भ जल अधिनियम, प्लास्टिक कचरा अधिनियम, सिनेमा अधिनियम तथा क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम मुख्य रूप से शामिल हैं। इनमें पहले कारावास की सजा के प्रावधान थे जिन्हें नया विधेयक आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित कर देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा हैै जो व्यवहारिकता के दृष्टिकोण से इतने बड़े पैमाने पर आपराधिक प्रावधानों को गैर आपराधिक श्रेणी में परिवर्तित करेगा। इनमें से कई प्रावधान मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े हुए हैं तो मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सुरक्षा और सुविधा की गारंटी में कोई ढील नही होनी दी जायेगी।
उद्योगों के साथ कर्मवीरों का भी ख्याल
औद्योगिकीकरण बढ़ाने के साथ-साथ सार्थक रोजगार सृजन की बात भी मुख्यमंत्री अपने दिमाग में रख रहे हैं। प्रत्येक कामगार को गरिमापूर्ण ढंग से परिवार चलाने के लिए अपेक्षित न्यूनतम वेतन मिले तभी किसी रोजगार को गिनने की मान्यता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहलू को अच्छी तरह आत्मसात किया है। यूपीकास का गठन इस सोच को प्रदर्शित करने वाला है। इसमें आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 16 हजार से 18 हजार रुपये तक न्यूनतम मानदेय निर्धारित किया जायेगा और सुनिश्चित किया जायेगा कि आउटसोर्स कर्मचारियों का हर महीने की पांच तारीख तक वेतन मिल जाये। यूपीकास यानी उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम ठेका कर्मचारियों के हितों की निगरानी के लिए बनाया गया है। अभी तक ठेका कंपनियां अपने कर्मचारियों के हर तरह के शोषण के लिए अधिकार संपन्न थीं। 7-8 हजार रुपये महीने की पगार पर जी तोड़ काम कराया जा रहा था। उनके बीमा, कार्यस्थल पर उनकी चिकित्सा, बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुदानित प्रबंध आदि कोई गारंटी उन्हें नही दी जा रही थी। भगवान भरोसे जिंदगी की कहावत ठेका कर्मचारियों पर लागू हो रही थी। लेकिन प्रस्तावित निगम के बाद इसमें बहुत कुछ बदल जाने की आशा है। निजी उपक्रम में भी कामगारों के हित संरक्षण के लिए व्यवस्थायें करने का योगी सरकार का इरादा इसमें निहित दिखाई देता है। आर्थिक उदारीकरण के मानवीय चेहरे की मांग अभी तक पाखंड बनी हुई थी लेकिन उत्तर प्रदेश कामगारों के लिए भी सबसे कल्याणकारी प्रदेश बनने की दिशा में अग्रसर होकर इसे सचमुच मूर्त रूप देता प्रतीत हो रहा है।
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