उरई। समाजसेवी डा. लोकेन्द्र की शिकायत पर संभागीय परिवहन अधिकारी प्रभात पाण्डेय ने उरई के एआरटीओ प्रवर्तन को निर्देश दिया है कि अनधिकृत रूप से सड़कों पर खड़ी होने वाली टूरिस्ट परमिट के चालान के लिए पुलिस और यातायात विभाग के सहयोग से अभियान चलाया जाये।
आरटीओ ने इस संबंध में जारी निर्देशों में कहा है कि ऐसी बसों के परमिट धारकों को अपने वाहन की पार्किंग, यात्रियों के बैठने की सुविधा और टिकिट बुकिंग ऑफिस स्थापित करने के लिए खुद से व्यवस्था करनी होती है। लेकिन वे अगर आम सड़क पर बस पार्क कर रहे हैं और सवारियां चढ़ा-उतार रहे हैं व नजूल की जमीन पर बिना किसी अनुबंध के बुकिंग ऑफिस चला रहे हैं तो यह गैर कानूनी है। इसे लेकर वैधानिक कार्रवाई की जाना नितांत अपेक्षित है।
उल्लेखनीय है कि विगत दिनों कालपी बस स्टैण्ड के पास जो उपद्रव हुआ था उससे यह स्पष्ट हो गया था कि जजी के समीप ट्रैवलिंग बसों के बुकिंग सेंटर सरकारी जमीन पर खुले हुए थे। इस मार्ग से अधिकारियों का भी आना-जाना रहता है। लेकिन इसके बावजूद किसी अधिकारी ने इसे संज्ञान में नही लिया कि किसकी अनुमति से बुकिंग सेंटर चल रहे हैं कभी इस बात को संबंधितों से पूंछ लें।
टूरिस्ट परमिट की बस के लिए बीच में किसी शहर के अंदर सवारियों को उतारने-बैठाने के लिए घुसनेे की इजाजत नही होती है। उनके परमिट की शर्त में रहता है कि वे प्रस्थान स्थल से गन्तव्य तक के लिए सवारियों का पैकेज लेगें। फुटकर सवारियों को मार्ग में चढ़ाना-उतारना उनके लिए अनुमन्य नही है। इसी प्रावधान के कारण कई बार टूरिस्ट परमिट की बसों का शहर में प्रवेश निषिद्ध किया गया है। लेकिन यह अनुशासन कुछ दिनों ही चलता है। इसके बाद प्रशासन फिर ढीला पड़ जाता है और टूरिस्ट परमिट की बसें नियमित परमिट की बसों की तरह शहर के भीतर आकर सवारियां लेने और ड्राप करने का काम करने लगती हैं।
डा. लोकेंद्र ने मुख्य रूप से कोंच बस स्टैण्ड पर शाम होते ही टूरिस्ट बसों के सड़क पर खड़े होने से उत्पन्न अव्यवस्था की ओर अपनी शिकायत में ध्यान दिलाया था। इसके बाद एक दिन बस स्टैण्ड के आस-पास अभियान चलाया गया जिसमें सड़क पर खड़ी 22 टूरिस्ट बसों का चालान कर दिया गया। लेकिन यह प्रतीकात्मक कार्रवाई थी। थोड़ा बहुत जुर्माना लगाकर परिवहन विभाग ने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। इसके कारण जेल रोड पर देर शाम तक यातायात के घमासान की स्थिति बनी रहती है। कई बार हादसे भी हो चके हैं।
डा. लोकेंद्र ने बताया कि जेल रोड के इधर-उधर घनी बस्तियों में आने-जाने के लिए मार्ग बने हैं। टूरिस्ट परमिट की बसें इन मार्गों के सामने खड़ी हो जाने से यहां की बस्तियों का कार्य-व्यापार बाधित रहता है। परिवहन विभाग और प्रशासन में सुव्यवस्था के लिए इच्छा शक्ति का अभाव देख डा. लोकेंद्र ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर भी इस शिकायत का मजमून डाल दिया है। देखना है कि प्रदेश के भाग्य विधाता का कार्यालय टूरिस्ट बस परमिट धारकों की मनमानी पर हाथ डालने की हिम्मत दिखा सकता है कि नहीं।







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