माधौगढ़: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित श्री मद भागवत कथा एवं नवरात्रि जागरण महोत्सव के अंतर्गत कथावाचक अग्निहोत्री जी महाराज कल सुदामा चरित्र की कथा का रसपूर्ण वर्णन करेंगे। आयोजन का भंडारा भी सभी श्रद्धालुओं के लिए आयोजित किया जाएगा।
इस महोत्सव के आयोजक विनय प्रताप सिंह कैलोर ने बताया कि यह कार्यक्रम भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और भक्ति की अनुभूति का अवसर प्रदान करेगा।
कथावाचक अग्निहोत्री महाराज ने कथा के मुख्य प्रसंगों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बाल श्रीकृष्ण के जीवन में हुई कई लीलाएँ न केवल मनोरंजक हैं, बल्कि भक्ति और संदेश से परिपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना, जब बाल कृष्ण को विषैला दूध पिलाने का प्रयास करती है, तो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उसका वध कर दिया जाता है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि जो लोग भक्ति और धर्म में बाधा डालते हैं, उनसे दूर रहना चाहिए।
इसके साथ ही महाराज ने गोवर्धन पूजा का प्रसंग भी बताया। इंद्र के क्रोध से गोकुल को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठाया, जिससे इंद्र का अहंकार और घमंड चकनाचूर हो गया।
कथावाचक ने रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह का प्रसंग भी साझा किया। छठे दिन के कार्यक्रम में भक्तों को श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की भव्य कथा सुनने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, महारास के पांच अध्याय का वर्णन भी किया जाएगा, जिन्हें भागवत के ‘पंच प्राण’ कहा जाता है। भावपूर्ण गायन और सुनने से वृंदावन की भक्ति का अनुभव सहज प्राप्त होता है।
महाराज ने बाल श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीलाओं का आशय भी समझाया। उन्होंने कहा कि माखन चोरी का वास्तविक अर्थ भक्तों के हृदय की भक्ति से जुड़ा है, जैसे श्रीकृष्ण ने माखन चोरी से लोगों के मनों में प्रेम और श्रद्धा उत्पन्न की।
कथावाचक ने अंत में यह संदेश भी दिया कि जीवन में ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए जो भक्तों के भाव और सेवा में बाधा डालते हैं। यही सच्ची भक्ति और आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग है।
भक्तों से अपील: आयोजक और कथावाचक ने सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे इस पावन अवसर पर भाग लेकर कथा और जागरण के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद और भक्ति की अनुभूति प्राप्त करें। कथा में सैकड़ो लोग मौजूद रहे।







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