पी. चिदंबरम को आजकल अतीत राग बहुत सुहा रहा है। वजह यह हो सकती है कि कांग्रेस की राजनीति में इस समय उनके पास महत्वपूर्ण भूमिका का अभाव है जिसने उन्हें खबरों की दुनियां से दूर कर दिया है। हो सकता है कि फिर से सुर्खियों में आने के लिए किसी प्रशान्त किशोर टाइप के मेनेजमेंट गुरू ने उन्हें यह कसरत सुझाई हो। कुछ दिनों पहले उन्होंने मुबंई के चर्चित 26/11 हमले को लेकर बयान दे दिया था कि भारत सरकार इसके जबाव में पाकिस्तान पर हमला बोल देने वाली थी लेकिन अमेरिका के दबाव में ऐसा नही कर सकी। भाजपा को उनके इस बयान से कांग्रेस को घेरने का मौका मिल गया था। बेमौसम की इस तान के कारण उनके इरादों को लेकर तमाम अटकलें चल पड़ी थीं लेकिन विलुप्तप्राय हो चुके चिदंबरम इसके चलते चर्चाओं के केंद्र में आने का वैसा मौका मिल गया था जिसके लिए शायद उनको छटपटाना पड़ रहा है।

चिदंबरम का फ्लैशबैक
पी. चिदंबरम अब ऑपरेशन ब्लू स्टार के गड़े मुर्दे उखाड़कर ले आये हैं। हिमाचल प्रदेश के कसौली में खुशवंत सिंह लिटरेचर फैस्टिवल के दौरान पत्रकार हरविन्दर बावेजा की किताब पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार का तरीका गलत था जिसकी कीमत इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि लेकिन इसमें अकेली इंदिरा गांधी गलत नहीं थीं। गलती के लिए सेना, खुफिया तंत्र, पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारी भी जिम्मेदार थे। उस समय जो खबरे छप रहीं थी उससे लगता था कि इंदिरा गांधी ने भी यह कार्रवाई किसी दुर्भावना या आवेश के कारण नही कराई। पता चलता है कि इंदिरा गांधी ने जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके मर्जीवड़ों ने स्वर्ण मंदिर पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया था। भिंडरावाले के पटठे सारे देश में मारकाट मचाये हुए थे। कई प्रमुख सिख हस्तियों की जान लेने में भी कोई गुरेज नही किया गया था। ऐसे में उनके दमन के लिए स्वर्ण मंदिर की उनकी सुरक्षित पनाहगाह को फिर से अपने कब्जे में लेना सरकार के लिए जरूरी हो गया था।

विकल्प दिखाये बिना खोज डाली गलती
यह कार्य कैसे हो प्रशासन, सेना, पुलिस व इंटेलीजेंस की विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों के साथ इंदिरा गांधी ने मैराथन बैठके की। स्वर्ण मंदिर को क्षति पहुंचाये बिना वहां से आतंकवादियों को कैसे खदेड़ा जाये इसका फुल प्रूफ ब्लू प्रिंट कोई सामने नही ला सका। आखिर में सैन्य कार्रवाई से इस लक्ष्य को हासिल करना एक मात्र विकल्प सूझने लगा। इंदिरा गांधी ने बड़े भरे मन से इसकी इजाजत दी। आज भी इसका उत्तर देना आसान नही है कि स्वर्ण मंदिर को खाली कराने का अन्य सुरक्षित उपाय क्या हो सकता था। पी. चिदंबरम ने जुबान उठाकर पटक देने का काम तो कर दिया लेकिन अगर उनसे पूंछा जाये कि इसके अलावा किस तरीके से देश की अखण्डता को बचाने की पहल हो सकती थी तो पूरा विश्वास है कि उनके मुंह से कोई सार्थक सुझाव नही निकल पायेगा। पी. चिदंबरम को पर उपदेश कुशल बहुतेरे की कहावत तो याद होगी। ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बेतुकी राय देकर उन्होंने यही किया है। उन्हें सोचना चाहिए था कि घर जलाकर रोशनी नही की जाती।

याद आ गये एसपी और चंद्रशेखर
सारा देश उस समय दुश्चिंताओं से जूझ रहा था। खालिस्तानियों को करारा सबक सिखाने की मांग हर किसी के दिल में थी। कांग्रेस से ज्यादा आरएसएस के लोगों में थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार को बेहद साहसिक कदम निरूपित किया जा रहा था। हिंदी में एक मात्र पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह थे जिन्होनें अपनी रविवार पत्रिका में ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना द्वारा की गयी बर्बरता पर चित्रों के साथ रिपोर्ट प्रकाशित की जिससे सुरेंद्र प्रताप जिन्हें प्यार से लोग आज भी एसपी के नाम से याद करते हैं लोगों के गुस्से के निशाने पर आ गये थे। लोगों को उनमें देशद्रोही का चेहरा दिखाई देने लगा था। नेताओं में भी अकेले चंद्रशेखर थे जिन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार का विरोध किया था। वे भी जनमानस के बीच देशद्रोह से बड़े खलनायक करार दिये जा रहे थे।

ज्ञानी जैल सिंह का रोल
अपने धर्म के सर्वोच्च केंद्र पर हुए हमले से सिखों में अपमान और गुस्सा की जबर्दस्त लहर दौड़ पड़ी थी जिसमें वे विवेक खो बैठे थे। इंदिरा गांधी के परिवार के बेहद नजदीकी पत्रकार खुशवंत सिंह ने सरकार से मिले सम्मान को वापस करते हुए इंदिरा गांधी की जोरदार भर्त्सना की थी। अधिकांश सिख पदाधिकारियों की यही हालत थी। अकेले राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह थे जिन्होंने देश के प्रति इम्तिहान की इस सबसे कठिन घड़ी में वफादारी का परिचय दिया था। वे ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद स्वर्ण मंदिर में अरदास करने पहुंचे। वहां की स्थिति देखकर वेदना से उनकी आंखें आंसुओं से भर गयी थीं। फिर भी उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने जैसी कोई घोषणा नही की। अगर वे भी भावुकता में ऐसा कर बैठते तो देश के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया होता। उनको तनखइया घोषित किये जाने की मार झेलनी पड़ी। इसके लिए स्वर्ण मंदिर में उन्होंने झूठे बर्तन धोए पर देश के सामने कोई धर्म संकट खड़ा नही होने दिया।

इंदिरा गांधी खुद भी थीं विचलित
इंदिरा गांधी भी इस कदम की नजाकत समझ रहीं थीं। उन्होंने वर्तमान सरकार की तरह इस कार्रवाई के बाद विजय का जश्न मनाने जैसी कोई हरकत नही की। सिखों को जो कष्ट हुआ था उसकी किसी भी तरह की भरपाई के लिए उन्होंने अपने आप को मानसिक रूप से तैयार कर लिया था। यही कारण है कि उन्होंने अपने सुरक्षा दस्ते से सिख गार्डों को हटाने की सलाह कतई मंजूर नही की। उन्हें चेताया गया कि ऐसा करके वे बहुत बड़ा जोखिम मोल ले रहीं हैं। लेकिन इंदिरा गांधी देश को बचाये रखने के लिए अपनी जान पर खेलने को तैयार थीं। इंदिरा गांधी ने बहुत कमियां थीं लेकिन व्यक्ति का मूल्यांकन इक्का-दुक्का घटनाओं के आधार पर किया जाना उचित नही हो सकता। समग्रता में इंदिरा गांधी के चरित्र का अनुमान लगाया जाये तो देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता बहुत बड़ी थी। इसी के चलते आखिर उन्हें अपनी शहादत सिख गार्डों के हाथ से ही देनी पड़ी।

ठक्कर आयोग की रिपोर्ट के गायब पन्ने
इस सबके पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के हाथ को अनदेखा नही किया जा सकता। इंदिरा गांधी के बाद उनके बेटे राजीव गांधी ने सत्ता संभाली लेकिन तो भी उन्हें इस मामले में खून का घूंट पीने के लिए मजबूर होना पड़ा। कहा जाता है कि ठक्कर आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सीआईए की करतूत को दर्ज कर दिया था लेकिन राजीव गांधी ने उस रिपोर्ट के कई पन्ने गायब कर दिये। विपक्ष ने इस पर बड़ा हंगामा भी किया था। लेकिन भारत उस समय कमजोर स्थिति में था। अमेरिका जैसी महाशक्ति से पंगा लेना उसे बहुत भारी पड़ता। इसलिए राजीव गांधी को देश को बचाये रखने के लिए अपनी मां की हत्या के असल षणयंत्रकर्ताओं को भूल जाना पड़ा। भाजपा के समर्थक हमारे मित्रों को शिकायत हो सकती है कि खालिस्तानी आंदोलन के पीछे कांग्रेस की राजनीति की भूमिका पर हम पर्दा डालकर निकल जाना चाहते हैं तो निश्चित रूप से इस मामले में कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ा करना पड़ेगा। अकालियों से पंजाब की राजनीति में पार पाने के लिए उसने ही भिंडरावाले नाम का भस्मासुर खड़ा किया जो आखिर में कांग्रेस के नेतृत्व को ही भस्म कर गया। राजीव गांधी के कार्यकाल में भी एक बड़ी बेवफाई हुई। ज्ञानी जैल सिंह जिन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा न देकर देश के साथ बड़ा उपकार किया था और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कई घंटों उनकी मौत की घोषणा छुपाये रखी थी तांकि अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में उनकी जगह राजीव को शपथ दिला सकें उन्हें राजीव ने बहुत बुरा सिला दिया। राजीव गांधी के मंत्रिमंडल के दो गुर्गों केके तिवारी और कल्पनाथ राय ने ज्ञानी जैल सिंह की छवि खराब करने के लिए लगातार यह आरोप लगाये कि उनके समय राष्ट्रपति भवन खालिस्तान का अडडा बन गया है। जब सारी सीमाएं टूट गयीं तो ज्ञानी जैल सिंह ने अपने पद की ताकत जैसे ही दिखाई राजीव गांधी जिनके पास भूतो न भविष्यतो बहुमत था घुटनों पर आ गये। उन्होंने ज्ञानी जैल सिंह से राष्ट्रपति भवन पहुंचकर गिले-शिकवे दूर किये और अपने दोनो उद्दण्ड मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया।

ज्ञानी ने राजीव को साजिशों से बचाया
बहुत छोटी पृष्ठभूमि से आये ज्ञानी जैल सिंह को देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाने में इंदिरा गांधी का जो योगदान रहा उसे ज्ञानी जी ने कभी विस्मृत नही किया। इसीलिए राजीव गांधी से बहुत मलाल हो जाने के बाद भी जब उन्हें उनके विरुद्ध षणयंत्र में शामिल करने की कोशिश की गयी तो ज्ञानी जैल सिंह बहकने की बजाय राजीव गांधी की राजनीति को सुरक्षित रखने के लिए चटटान की तरह खड़े हो गये। विद्याचरण शुक्ला एंड कंपनी चाहती थी कि ज्ञानी जी राजीव गांधी को बर्खास्त करके उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलवा दें लेकिन ज्ञानी जैल सिंह ने संदेशवाहकों को यह कहकर टहला दिया कि विद्याचरण को तो नहीं अगर वीपी सिंह को लाओ तो वे ऐसा कर देंगे। दूसरी ओर उन्होंने राजीव गांधी को इस सूचना से अवगत कराकर आगाह कर दिया।

सोनिया का डैमेज कंट्रोल
ऑपरेशन ब्लू स्टार का नासूर तो सिखों को साल ही रहा था उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या से उपजे आक्रोश में बड़ी संख्या में सिखों की जान लिये जाने का तांडव हो गया। इससे ऐसा अवसर आ गया था कि जिससे लोगों को लगा कि सिख हमेशा के लिए देश से अलग होने की सोच बैठे हैं। फिर जब सोनिया गांधी राजनीति में आईं तो सिख मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाना डैमेज कंट्रोल का बड़ा कदम साबित हुआ। इसके बाद ही खालिस्तान की मांग बेकाम हो गयी। सोनिया गांधी और उसके बाद राहुल गांधी के ऑपरेशन ब्लू स्टार और सिख नरसंहार पर क्षमा याचना कर लेने से इस अध्याय का पूरी तरह पटाक्षेप हो गया है। पी. चिदंबरम ने पता नही क्या सोचकर इस पर मुंह खोलने की जरूरत समझी। देश के एक बड़े नेता होने के नाते उन्हें राष्ट्रीय हितों के लिए संवेदनशील होना चाहिए।







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