अनाथ हुई चार नन्हीं बेटियों की जिंदगी में उम्मीद की किरण बने समाजसेवी 

माधौगढ़-मानवता आज भी जिंदा है, इसका जीता-जागता उदाहरण हाल ही में जालौन के रामपुरा क्षेत्र के पृथ्वीपुरा गांव में देखने को मिला, जहाँ चार मासूम अनाथ बेटियाँ अपने माता-पिता के निधन के बाद जीवन की कठिन डगर पर अकेली रह गई थीं।

इन चारों बेटियों  सोनी (14 वर्ष), शिवानी (11 वर्ष), शिवी (9 वर्ष) और जानवी (5 वर्ष) की मासूम आँखों में दर्द और भविष्य की चिंता झलक रही थी। घर का सहारा छिन जाने के बाद वे अपने बुजुर्ग दादा रमेशचंद्र पाल के साये में रह रही हैं, जो स्वयं असहाय परिस्थितियों में बेटियों का पालन-पोषण करने की कोशिश कर रहे हैं। दुर्भाग्य यह कि अब तक कोई सरकारी सहायता या योजना इन बेटियों तक नहीं पहुँच सकी। न शिक्षा के लिए सहयोग मिला, न ही दैनिक जरूरतों के लिए किसी का हाथ आगे बढ़ा।

ऐसे कठिन समय में कैलोर निवासी समाजसेवी श्री सत्यम सिंह राजावत ने जब इन बेटियों की स्थिति के बारे में सुना, तो बिना देर किए स्वयं गांव पहुँचे। उन्होंने वहाँ जाकर बेटियों से मुलाकात की, उन्हें राशन, कपड़े, और आवश्यक जीवन उपयोगी सामग्री प्रदान की।

सिर्फ इतना ही नहीं, सत्यम सिंह राजावत ने इन बच्चियों की शिक्षा और जीवन-यापन की जिम्मेदारी आगे भी निभाने का वचन दिया। उनका कहना है कि इन बेटियों की मुस्कान ही अब मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। जब तक संभव होगा, मैं इनके साथ खड़ा रहूँगा।

उनके इस मानवीय कदम से न केवल गांव में बल्कि पूरे क्षेत्र में एक संवेदनशील संदेश गया है कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं,जो मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं।

पृथ्वीपुरा की ये चार नन्हीं जिंदगियाँ अब अकेली नहीं हैं,उनके साथ अब समाजसेवा और करुणा की शक्ति खड़ी है।

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