संजीव गुर्जर के घर पहुँच स्वतंत्र देव ने ताजा कीं पुरानी यादें

उरई | सम्बन्ध निभाना कोई प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव से सीखे | प्रदेश के हैवीवेट नेता के रूप में स्थापित हो जाने के बाबजूद वे शुरूआती दिनों के अपने लंगोटिया यारों को नहीं भूलते | गत दिनों भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता संजीव गुर्जर धगुआ की दिवंगत माँ को श्रद्धांजलि देने के लिए वे सारे प्रोटोकाल तोड़ कर जिस आत्मीय अंदाज में पहुंचे वह उनकी इस सरलता का एक उदाहरण बन गया |

  संजीव गुर्जर से आरंभिक दिनों में उनका बहुत जुड़ाव रहा था | बाद में वे राष्ट्रीय पहचान के साथ प्रदेश की राजनीति के एक प्रमुख स्तम्भ बन गए पर अपने पुराने मित्रों को उन्होंने गुरु गंभीर व्यस्तताओं के बाबजूद नहीं भुलाया | संजीव गुर्जर की मां के निधन का समाचार जब उन्हें मिला तो वे दूसरे राज्य में पार्टी के काम में व्यस्त थे | फिर भी उनका फोन तत्काल संजीव के पास पहुंचा | उन्होंने द्रवित शब्दों में मां जी के गोलोक गमन पर शोक जताया तो संजीव विह्वल तो हो गए लेकिन उन्हें मजबूत संबल का भी अनुभव हुआ |

  बाद में गत दिनों जब वे उरई प्रवास पर थे तो संजीव गुर्जर की  दिवंगत मां जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए वे अधीर हो कर उनके घर पहुंचे | उन्होंने संजीव से पूरे परिवार की कुशलक्षेम पूँछी | उन्होंने संजीव को भरोसा दिलाया कि वे शुरूआती दिनों की तरह ही हर मोड़ पर उनके साथ खड़े मिलेंगे | काफी देर तक  उन्होंने संजीव के साथ पुराने दिनों की याद ताजा की | उनके छोटे भाई रामजी से भी हार्दिकता से मिले | उनकी पुरानी टोली के एक और साथी  भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बृजभूषण सिंह मुन्नू , जिलाध्यक्ष भाजपा उर्विजा दीक्षित , क्षेत्रीय मंत्री संजीव उपाध्याय , उद्योगपति मनीष गुप्ता , संजय अग्रवाल , प्रखर युवा नेता सुमित प्रताप और स्वतंत्र जी के प्रतिनिधि अरविन्द चौहान भी उपस्थित रहे |

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