उरई।
जल सहेली एवं परमार्थ समाज सेवी संस्थान द्वारा जनपद जालौन के रामपुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डिकौली जागीर की AI-आधारित मॉडल ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) का प्रभावशाली एवं नवाचारपूर्ण प्रस्तुतीकरण जिलाधिकारी के समक्ष किया गया।
प्रस्तुतीकरण के दौरान जिलाधिकारी ने परमार्थ समाज सेवी संस्थान के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि AI-आधारित एवं साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण प्रक्रिया को जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में अपनाया जाना चाहिए, जिससे ग्राम के प्रत्येक वर्ग—विशेषकर महिलाएं, वंचित एवं कमजोर तबके—के मुद्दे योजनाओं में समुचित रूप से सम्मिलित हो सकें।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि सशक्त ग्राम सभा एवं महिला सभा के माध्यम से ही एक समावेशी, व्यावहारिक एवं प्रभावी ग्राम पंचायत विकास योजना का निर्माण संभव है। ऐसी प्रक्रियाएं न केवल योजनाओं की गुणवत्ता बढ़ाती हैं, बल्कि जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास सुनिश्चित करती हैं।
उल्लेखनीय है कि यह संपूर्ण GPDP प्रक्रिया विकासखंड रामपुरा की चयनित पांच ग्राम पंचायतों—मिर्जापुरा जागीर, सिद्धपुरा, कस्बा, महटौली एवं डिकौली जागीर—में लागू की जानी है, जिनमें से फिलहाल डिकौली जागीर में इसे मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया है।
इस योजना निर्माण प्रक्रिया में ग्राम समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं, प्राथमिकताओं एवं स्थानीय समस्याओं को केंद्र में रखा गया। AI-आधारित विश्लेषण एवं वैज्ञानिक आकलन प्रणाली के माध्यम से ग्राम स्तर की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान हेतु साक्ष्य-आधारित प्रस्ताव तैयार किए गए।
प्रस्तुतीकरण के अवसर पर परमार्थ समाज सेवी संस्थान की ओर से कृष्ण कुमार, शिवमंगल सिंह, जूली, गोविंद सहित जल सहेलियाँ चित्रगंधा एवं सोमवती उपस्थित रहीं। सभी ने सामुदायिक सहभागिता आधारित इस नवाचार को ग्राम विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
परमार्थ समाज सेवी संस्थान का यह प्रयास ग्रामीण विकास में तकनीक, सहभागिता और पारदर्शिता का एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है, जिसे भविष्य में अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी मॉडल के रूप में अपनाया जा सकता है।







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