वरिष्ठ कवयित्री शिखा गर्ग शॉल ओढ़ाकर सम्मानित, गीत–ग़ज़लों से गूंजा चित्रांशविला
उरई।
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर उरई–कोंच रोड स्थित चित्रांशविला में अमिता साहित्य मंच द्वारा भव्य काव्यसंध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद के प्रख्यात शायर शफीकुर्रहमान कशफ़ी ने की, जबकि संचालन युवा कवि अभिषेक सरल ने किया। इस अवसर पर नगर के कवि एवं शायरों ने अपनी रचनाओं से काव्य संध्या को ऊँचाइयों तक पहुंचाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गरिमा पाठक की भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात कवियों ने एक से बढ़कर एक गीत, ग़ज़ल और कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रगति मिश्रा ने “कृपा करो मां सरस्वती ऐसी, लिखूं मैं कविता सबके के जैसी” पढ़कर सरस्वती की आराधना की।
दिव्यांशु दिव्य ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को समर्पित पंक्तियाँ पढ़ीं—“भारतीय संस्कृति को विश्व में पहुंचाने वाले, विवेकानंद के बेटे हम हिन्द की कहानी हैं।”
अतीक खान ने अपनी ग़ज़ल “क्या बताऊं तुमको मैं किस अदा से देखा है…” से खूब वाहवाही लूटी।
संचालक अभिषेक सरल ने “जन्म जयंती दी पावन नामों की, जय हो ज्ञान धर्म के धामों की” पढ़कर माहौल को राष्ट्रभाव से भर दिया।
गरिमा पाठक ने पुनः विवेकानंद पर केंद्रित रचना “अमेरिका में आपका भाषण देता आनंद है…” प्रस्तुत की।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवयित्री शिखा गर्ग को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। उन्होंने काव्यपाठ में “ज़िंदगी नाज़ करती है जिस पर यहां, होते स्वामी विवेकानंद से कम ही यहां” पढ़कर भावुक कर दिया।
शायर अख्तर जलील ने ग़ज़ल “मेरे अल्लाह मेरे खेत में पानी देकर…” के माध्यम से किसान संवेदना को स्वर दिया।
साहित्यसभा के अध्यक्ष अनुज भदौरिया ने “यादों में मैं बैठा-बैठा आज रहा हूं गिन, वो बचपन के दिन…” पढ़ा।
इसी क्रम में अवध पाठक ने युवा दिवस पर आधारित ओजपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शफीकुर्रहमान कशफ़ी ने कहा कि “साहित्यकार समाज का आईना होता है। उसे सदैव सच लिखना चाहिए और देश व समाज की प्रगति का संदेश देना चाहिए।” उन्होंने अपनी रचना “आईना और फकीरों का कोई नहीं जवाब…” से काव्यसंध्या को सार्थक ऊंचाई दी।
कार्यक्रम में शिक्षक डी.पी. सिंह, गौरव खरे, विशाल सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। काव्यसंध्या ने स्वामी विवेकानंद के विचारों, युवा चेतना और साहित्यिक सौहार्द का सशक्त संदेश दिया।






Leave a comment