प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शूरवीरों द्वारा बसाए गए गांव में जुटेगा भव्य प्रशासनिक मेला

उरई। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वीर शूरवीरों द्वारा बसाए गए ऐतिहासिक निनावली गांव में मंगलवार को जिलाधिकारी के नेतृत्व में भव्य प्रशासनिक मेला जुटेगा। कुठौद थानांतर्गत आने वाले इस दुर्गम बीहड़ के गांव को चकरनगर स्टेट के डिबौली जागीरदारों ने गुमनामी की छाया में बसाया था। यहां के ग्रामीण आज भी उन क्रांतिकारियों की गाथाओं को गर्व से सुनाते हैं, जो फिरंगियों से लोहा लेने वालों के वंशज हैं।डिबौली घाट का रक्तरंजित अध्याय

साल 1857 में डिबौली घाट पर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का एक भीषण युद्ध हुआ। स्थानीय जागीरदारों ने अंग्रेज फौज पर जबरदस्त हमला बोला और फिरंगियों के छक्के छुड़ा दिए। लेकिन संख्याबल में भारी अंग्रेज सेना ने क्रूरता से क्रांतिकारियों को कुचल दिया। हार के बाद शूरवीरों को जान बचाने के लिए पलायन करना पड़ा। उन्होंने अपने रिश्तेदार जगम्मनपुर के राजा के दरबार में शरण ली। राजा ने यमुना नदी के किनारे घने बीहड़ों में उन्हें दुर्गम आश्रय प्रदान किया, ताकि ब्रिटिश खुफिया तंत्र की नजर से बच सकें।टीले पर बसी गढ़ी, नाम पड़ा निनावली

बीहड़ के एक विशाल टीले पर शूरवीरों ने मजबूत गढ़ी का निर्माण किया और यहीं निनावली गांव बसाया। यह नाम उनके गुमनामीपूर्ण जीवन की याद दिलाता है। लगभग 60 वर्ष पूर्व जब गढ़ी का मुख्य कुआं सूख गया, तो तत्कालीन मुखिया महेंद्र सिंह चौहान ने साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने पूरे गांव को खेतों के बीच स्थानांतरित कर दिया। आज यह कोठी निनावली के नाम से विख्यात है, क्योंकि ब्रिटिश काल में यहां नील की एक विशाल कोठी स्थापित थी, जहां जबरन किसानों से नील की खेती कराई जाती थी। गांव की आबादी अब करीब 2 हजार है, और ज्यादातर निवासी चौहान समुदाय के हैं, जो उन शूरवीरों के सीधे वंशज हैं।डीएम का चौपाल और तर्पण भ्रमण

मंगलवार को जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय पूरे प्रशासनिक अमले के साथ कोठी निनावली के पंचायत मुख्यालय कंझारी पहुंचेंगे। यहां वे ग्रामीणों की लंबित समस्याओं पर चौपाल लगाकर सुनवाई करेंगे। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद डीएम प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शूरवीरों के तर्पण स्वरूप निनावली गढ़ी स्थल का भ्रमण करेंगे। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वे डीएम से गांव में सड़क निर्माण, नील कोठी के अवशेषों को पर्यटन स्थल बनाने और शूरवीरों की स्मृति में स्मारक स्थापित करने की मांग करेंगे।ग्रामीणों में उत्साह, अपेक्षाएं बढ़ीं

गांव के निवासी समाजसेवी राजा सिंह चौहान ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने देश के लिए बलिदान दिया, लेकिन आजादी के बाद भी गांव विकास की रफ्तार से वंचित रहा। डीएम का यह दौरा ऐतिहासिक होगा।” पंचायत सचिव ने बताया कि मेला सुबह 10 बजे से शुरू होगा और दोपहर तक चलेगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यह आयोजन न केवल प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करेगा, बल्कि 1857 की गौरव गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा।

Leave a comment