अनुज भदौरिया के जन्मोत्सव पर भव्य कवि सम्मेलन–मुशायरे का आयोजन
उरई। रामनगर स्थित उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा संस्था के अध्यक्ष डॉ. अनुज भदौरिया के जन्मोत्सव के अवसर पर एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रामशंकर गौर ने की, जबकि संचालन कवयित्री प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत अख्तर जलील की नातेपाक एवं प्रिया दिव्यम की सरस्वती वंदना से हुई। देर रात तक अनवरत चले इस साहित्यिक आयोजन में नगर व बाहर से आए कवियों-शायरों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शिखा गर्ग ने
“दस्तक नहीं वो सुनता, खड़ी दर पे हूँ कब से,
ये बंद पड़े द्वार मुझे काट रहे हैं”
पढ़कर खूब सराहना बटोरी।
वीरेंद्र तिवारी ने देशभक्ति से ओत-प्रोत पंक्तियाँ—
“देश प्रेम है धर्म हमारा, हमें धर्म पे चलना है,
देश प्रेम की खातिर हमने इस वर्दी को पहना है”
से वातावरण को राष्ट्रभाव से भर दिया।
सिद्धार्थ त्रिपाठी ने प्रेम भाव में—
“दिल से दिल के मिलन का क्या फायदा,
अधरों ने अधर जब छुए ही नहीं”
सुनाया।
असरार अहमद मुक़री ने सामाजिक व्यंग्य के साथ—
“बुलंद अपना वो किरदार करने वाला है,
गुलामी बीवी की स्वीकार करने वाला है”
पेश किया।
इटावा से आए शायर आमिर इटावी ने जोशीले अंदाज़ में—
“अगर फिर भी न माने तो तुम्हारी राजधानी पर तिरंगा गाड़ देंगे,
और हिंदुस्तान लिख देंगे”
सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने
“ज़माने भर में छा जाओ, कभी ग़म के न घेरे हों,
खुशी से ज़िंदगी बीते, खुशी के ही सबेरे हों”
से श्रोताओं को भावविभोर किया।
शायर अनवार साहब ने—
“याद उनकी दिला गया कोई,
मेरे दिल को दुखा गया कोई”
पढ़ा।
किरपालु जी ने
“आशीष तुझको है ढेरों मेरा,
वो अनुज है तो मोहब्बत का हक़दार है”
सुनाया।
सभा के संयोजक शायर कश्फ़ी ने—
“है ख़ास आज भी लेकिन मेरी दुआ है अनुज,
रहो सलामत हर दिन तुम्हें मुबारक हो”
पढ़कर जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।
अख्तर जलील ने
“जब भी देखो हसीन लगते हो,
तुम ग़ज़ल की ज़मीन लगते हो”
से श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं।
अपने जन्मदिन पर डॉ. अनुज भदौरिया ने
“वो बचपन के दिन, वो बचपन के दिन”
गीत सुनाकर सभी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अध्यक्षीय काव्यपाठ में रामशंकर गौर ने—
“वो जन्मदिन में बुलाके हमको जहाँ की खुशियाँ लुटा रहे हैं,
जो मोमबत्ती बुझा रहे हैं, वो केक हमको खिला रहे हैं”
पढ़ा।
इस अवसर पर गरिमा पाठक, अभिषेक सरल, अतीक खान, दिव्यांशु दिव्य, प्रगति मिश्रा ने भी काव्यपाठ कर जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनुज भदौरिया ने सभी अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।







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