उरई।
मैत्री बुद्ध विहार, बाघौरा उरई में आज दिनांक 22 जनवरी 2026 को आयोजित बुद्ध धम्मदेशना के द्वितीय दिवस के अवसर पर भगवान बुद्ध के बचपन से युवावस्था तक के जीवन प्रसंगों का संगीतमय वाचन किया गया। कथावाचक अरविन्द बौद्ध ने भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से बुद्ध के जीवन की करुणामयी कथा श्रोताओं के समक्ष रखी।
इस अवसर पर भदंत शीलानन्द भूप ने कहा कि तथागत बुद्ध बचपन से ही अत्यंत संवेदनशील थे। उनके पिता राजा शुद्धोधन ने उन्हें दुःखों से दूर रखने का हर संभव प्रयास किया, किंतु बुद्ध सदैव मानव पीड़ा से व्यथित रहते थे। इन्हीं प्रश्नों के समाधान की खोज ने आगे चलकर उन्हें संन्यास और ज्ञान मार्ग की ओर प्रेरित किया।
वहीं भदंत ज्ञान ज्योति ने कहा कि तथागत बुद्ध का धम्म मार्ग लगभग 2500 वर्ष पूर्व विश्व को शांति, करुणा और ज्ञान का संदेश देने वाला बना। भारत से भिक्षुगणों द्वारा बुद्ध धम्म को पूरे विश्व में फैलाया गया, जिससे भारत को विश्वगुरु की पहचान मिली।
कथावाचक अरविन्द बौद्ध की संगीतमय प्रस्तुति ने उपस्थित बौद्ध अनुयायियों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन रामबिहारी बौद्धाचार्य ने किया।
इस अवसर पर विशेष सहयोगी के रूप में राम सिंह आजाद, गजेन्द्र सिंह, मोतीलाल पप्पू, सुरेश चंद आजाद, माताप्रसाद, रामनारायण वर्मा, चन्द्रभान, मूर्तिदिवाकर, किशोरी देवी, अर्चना बौद्ध सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।






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