मानव–मानव एक समान ही बुद्ध धम्म की पहचान: भदंत शीलानन्द भूप

उरई, 23 जनवरी 2026।
करुणा, समता और प्रज्ञा के आलोक से सराबोर मैत्री बुद्ध विहार, बाघौरा उरई में आयोजित बौद्ध धम्मदेशना के तृतीय दिवस का वातावरण उस समय भाव-विभोर हो उठा, जब तथागत बुद्ध के संन्यास से बोधिसत्व गौतम बनने तक की गाथा श्रोताओं के हृदय में उतरती चली गई।

कथावाचक अरविन्द बौद्ध ने अपनी अत्यंत प्रभावशाली संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि कैसे राजकुमार सिद्धार्थ ने संसारिक वैभव त्याग कर पीपल वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या की और एक पत्ते से गिरी ओस की बूंद के माध्यम से जीवन के अंतिम प्रश्न का उत्तर पा लिया। उन्होंने कहा कि सम्यक वाणी, सम्यक ज्ञान और सम्यक दर्शन से ही अज्ञान का नाश होता है और मानव जीवन संसार के कल्याण का माध्यम बनता है।

इस अवसर पर भदंत शीलानन्द भूप ने कहा कि बुद्ध धम्म की मूल पहचान ही मानव–मानव की समानता है। इसमें ऊँच-नीच और भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। तथागत बुद्ध स्वयं पैदल चलकर भिक्षा ग्रहण करते थे और राजा हो या रंक—सभी की भिक्षा को एक ही पात्र में समान भाव से स्वीकार करते थे। उन्होंने धार्मिक आडंबर और पाखंड के विरुद्ध निर्भीक होकर विचार रखे, यही कारण था कि उस समय के बड़े-बड़े ज्ञानी भी बुद्ध की शरण में आए। बुद्ध सदैव सर्वजन मंगल की कामना करते थे।

भदंत ज्ञान ज्योति ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने नागपुर में पांच लाख लोगों के साथ बौद्ध धम्म अपनाकर, हजारों वर्ष पूर्व भारत में जन्मे बुद्ध धम्म का पुनर्जागरण किया और वंचित समाज को सम्मान व आत्मगौरव का मार्ग दिखाया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ मिशनरी चैनसुख भारती, प्रधानाचार्य पुनीत भारती एवं प्रेमचंद्र भारती ने काव्य पाठ के माध्यम से बाबा साहब आंबेडकर के बौद्ध धम्म में योगदान को भावपूर्ण ढंग से स्मरण किया।

कार्यक्रम का संचालन रामबिहारी बौद्धाचार्य ने किया।
इस अवसर पर नवनियुक्त बसपा जिलाध्यक्ष अतरसिंह पाल, सुधाकर राव गौतम, प्रधानाचार्य रामसिंह मूलचरण फौजी, आर.एन. वर्मा, अजय भास्कर, हरनारायण दोहरे, माताप्रसाद, मोतीलाल, रामवातार गौतम, अजय गौतम महाराज केशकली, मूर्तिदिवाकर, कुसुमलता, अर्चना बौद्ध सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धम्मदेशना का यह तृतीय दिवस करुणा, समता और प्रज्ञा के संदेश के साथ श्रोताओं के मन में बुद्ध धम्म के अमिट संस्कार छोड़ गया।

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