उरई।
संभावित हवाई हमले जैसी आपात परिस्थितियों में जन-सुरक्षा, त्वरित राहत एवं प्रभावी बचाव की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से प्रमुख सचिव, नागरिक सुरक्षा अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार आज पुलिस लाइन परिसर में नागरिक सुरक्षा की ब्लैकआउट मॉकड्रिल का व्यापक और प्रभावी आयोजन किया गया। पूरा परिसर कुछ ही पलों में युद्धकालीन हालात का जीवंत दृश्य प्रस्तुत करता नजर आया।
मॉकड्रिल की शुरुआत होते ही ऊँची-नीची तेज आवाज में दो मिनट तक सायरन गूंजा, जिसने हवाई हमले की चेतावनी का संकेत दिया। सायरन की आवाज के साथ ही नागरिकों को सुरक्षित शेल्टर तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशिक्षित दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। इसके बाद ऑल क्लियर संकेत के रूप में सामान्य ध्वनि में दो मिनट तक सायरन बजाकर स्थिति सामान्य होने का संदेश दिया गया।
अभ्यास के दौरान हवाई हमले से उत्पन्न आगजनी की स्थिति को सजीव रूप में दर्शाया गया। अग्निशमन विभाग ने फायर टेंडर और आधुनिक अग्निशमन यंत्रों की सहायता से आग पर काबू पाने का त्वरित और सटीक प्रदर्शन किया। वहीं, क्षतिग्रस्त भवनों से घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर प्राथमिक उपचार प्रदान किया। गंभीर रूप से घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुँचाने का भी सफल अभ्यास किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने मॉकड्रिल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को सतर्कता, तत्परता और आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी मॉकड्रिल आपात स्थितियों में मानव जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और इससे प्रशासनिक एवं आपात सेवा इकाइयों की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
मॉकड्रिल में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) एवं प्रभारी अधिकारी संजय कुमार, नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा, एमएलसी प्रतिनिधि मयंक त्रिपाठी, जिला आपदा विशेषज्ञ, नागरिक सुरक्षा के अधिकारी-कर्मचारी, कलेक्ट्रेट स्टाफ तथा जनपद के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी ने सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के अभ्यासों से आपदा के समय त्वरित, प्रभावी और संगठित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।







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