उरई।
कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब रामपुरा क्षेत्र से आई एक बुज़ुर्ग दादी अपने तीन मासूम पोते-पोतियों को लेकर जिलाधिकारी के सामने खड़ी हुई। कांपती आवाज़ और भराई आंखों से दादी ने बताया कि उनके बेटे-बहू दोनों दुनिया छोड़ चुके हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का बोझ अब उनके बूढ़े कंधों पर आ गया है।
दादी की बात सुनते ही जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने मामले को गंभीरता से लिया। बिना देर किए जिला प्रोबेशन अधिकारी को बुलाया गया और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत बच्चों को तत्काल लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराई गई। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी को बच्चों की पढ़ाई में किसी भी तरह की परेशानी न आने देने के सख्त निर्देश दिए गए।
जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने देखा कि कैसे एक दादी की बेबसी पर प्रशासन ने संवेदना दिखाई। यह जनसुनवाई सिर्फ फरियाद सुनने का मंच नहीं रही, बल्कि जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बन गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में मानवीय संवेदना के साथ त्वरित कार्यवाही की जाए।
इस जनसुनवाई में बिजली, पेंशन, आवास, राजस्व और पारिवारिक विवाद से जुड़े कई मामलों का भी मौके पर निस्तारण किया गया, लेकिन दादी और तीन मासूमों की कहानी हर किसी के दिल को छू गई।







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