उरई | मैत्री बुद्ध विहार, बाघौरा उरई के प्रांगण में आयोजित बुद्ध धम्मदेशना के चतुर्थ दिन वातावरण करुणा, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। कथावाचक अरविन्द बौद्ध ने लोकसंगीत की मधुर शैली में तथागत बुद्ध के धम्ममार्ग का वाचन किया, जिसे सुनकर उपस्थित बुद्ध अनुयायी भावविभोर हो गए।
धम्मदेशना के दौरान प्रांगण में बैठे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे रोचक प्रसंगों के माध्यम से बुद्ध के जीवन और उपदेशों का रसास्वादन करते नजर आए। लोकधुनों के साथ प्रस्तुत कथाओं ने धम्म को जन-जन तक सरल और प्रभावी रूप में पहुंचाया।
इस अवसर पर भदंत शीलानन्द भूप ने तथागत बुद्ध के पंचशील पर प्रकाश डालते हुए सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्व शांति, सद्भाव और समृद्धि के लिए बुद्ध के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक और सक्रिय हैं, जितने हजारों वर्ष पूर्व थे।
भदंत ज्ञान ज्योति ने बुद्ध के मध्यम मार्ग की व्याख्या करते हुए कहा कि यह मार्ग मानव जीवन को समस्त दुखों से दूर करता है, क्योंकि अत्यधिक इच्छा ही मनुष्य के दुखों का मूल कारण बन जाती है।
कार्यक्रम में भदंत कश्यप (झांसी) की विशिष्ट उपस्थिति रही, जिनकी उपस्थिति से धम्मसभा और अधिक गरिमामय हो गई।
धम्मदेशना के दौरान भिक्खु संघ के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करते हुए साध्य बुद्ध विहार पिठौरिया झांसी की ओर से नितिन कुमार, माताप्रसाद आज़ाद ने भिक्खुगणों को धम्मदान किया। वहीं गौतम अहिरवार, रामसेवक प्रधान रहिया एवं कांशीराम फौजी ने सभी भिक्खुओं को कंबल दान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रामबिहारी बौद्धाचार्य, रामाकांत दोहरे, अजय गौतम महाराज, रामसिंह चौधरी, मोतीलाल, अशोक कुमार, महेंद्र गौतम, आर.एन. वर्मा, रामप्रकाश भास्कर, कुलदीप सिंह, वर्षा भास्कर, ज्योति भास्कर, अर्चना गौतम, विटोली जाटव, रामकली, कुंती भास्कर, पुष्पा, सुनीता, पिंकी, मुन्नी देवी, सुशीला सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।







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