जालौन, 29 जनवरी।
निर्धन परिवारों को पक्का मकान देने की सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री आवास योजना जालौन में घूस का नया अड्डा बनती नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को छत देने के नाम पर क्षेत्र पंचायत कार्यालयों में खुलेआम पांच हजार रुपये की वसूली की जा रही है। पीड़ित ग्रामीणों ने इस लूट पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी से गुहार लगाई है।

प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को पक्का मकान निर्माण के लिए ₹1 लाख 20 हजार की आर्थिक सहायता सीधे खाते में दी जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि योजना का लाभ पाने के लिए गरीबों को पहले रिश्वत की सीढ़ी चढ़नी पड़ रही है।

ग्रामीण पंकज कुमार, शैलेंद्र सिंह, अजय सिंह, मंगल सिंह, जमुनादास सहित कई लोगों का आरोप है कि क्षेत्र पंचायत कार्यालय में मुख्यमंत्री आवास योजना का कार्य देख रहे बाबू खुले तौर पर पांच हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। साफ कहा जा रहा है—पैसा दोगे तो नाम सूची में आएगा, नहीं तो मकान का सपना भूल जाओ।

ग्रामीणों का कहना है कि जो व्यक्ति रिश्वत देता है, उसी को योजना का लाभ दिलाया जा रहा है, जबकि वास्तविक जरूरतमंद दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। सरकार की गरीब कल्याणकारी योजना को इस तरह नोटों की नीलामी में तब्दील कर दिया गया है।

पीड़ित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि
मुख्यमंत्री आवास योजना के नाम पर चल रही इस घूसखोरी की निष्पक्ष जांच कराई जाए,
दोषी बाबू की भूमिका की जांच कर उसके खिलाफ कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए,
ताकि ग्रामीण क्षेत्र के वास्तविक निर्धन परिवारों को सरकार की इस महत्वपूर्ण आवासीय योजना का लाभ मिल सके।

अब सवाल यह है—
क्या गरीबों की छत पर रिश्वत की छाया यूं ही पड़ी रहेगी,
या प्रशासन इस खुली लूट पर लगाम कसने के लिए आगे आएगा?

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